गोंडा : खाकी की हनक से जातिवाद को बढ़ावा देने के खेल में ब्राह्मणों का उत्पीड़न !

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कर्नलगंज : गोनवा

विगत दिनों ग्राम के सूबेदार पुरवा में दो पक्षों के विवाद को जनपद के अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र कुमार अथवा श्रम जीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष कैलाश नाथ वर्मा द्वारा जातीय रंग दे कर वर्मा बनाम ब्राह्मण बना दिया गया कैसे ? इसकी विस्तार यात्रा में सबसे पहले उस वाक्ये का वर्णन ज़रूरी है जिससे विवाद की शुरुवात हुयी ! उग्रसेन मिश्रा जो की पेशे से सिविल कोर्ट में अधिवक्ता हैं। उन्ही के घर का लड़का नाम आदर्श मिश्रा जिसने वर्मा परिवार के किसी सदस्य को खुले में सार्वजनिक मार्ग पर शौच करने से मना किया था उसी बात से गुस्साए वर्मा परिवार ने आदर्श को उस स्थान पर बुलाया जहां जिस स्थान पर शौच के लिए उसने मना किया था तभी उस पर पीछे से हमला करते हुए कुछ लोगों ने उसका गला रस्सी से जकड़ दिया आदर्श की चीख पुकार सुन कर उसके परिवार वाले घटना स्थल की तरफ दौड़े और दोनों पक्षों में जम कर मार पीट हुयी ! जिसमे दोनों पक्षों को चोटें आईं ! अब इस घटना को वर्मा कम्युनिटी बनाम सरदार पटेल संस्था के संचालक अपर पुलिस अधीक्षक अथवा जनपद के एक बड़े रसूखदार पत्रकार जो डी.डी.न्यूज सर्किल न्यूज एप्प हेड तथा कुछ तथा कथित समाचार पत्रों का संचालन करने के साथ श्रम जीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष कैलाश नाथ वर्मा ने इसे जातीय रंग देने के लिए ब्राह्मण परिवार के विरुद्ध पूरी ताकत लगा दी।

एक ने मीडिया में वर्मा परिवार को अर्धनग्न करके खबरे प्रकाशित की दूसरे ने अपनी वर्दी की ताकत से ब्राह्मण परिवार पर मुकदमा लिखने के लिए कोतवाल कर्नलगंज को आदेशित करते हुए कहा की अगर तुम्हारे हाथ ब्राह्मणों पर मुकदमा लिखने से कांपते हैं तो लाओ मैं खुद लिख देता हूँ ये सख्त आदेश उन्होंने गाँव वालों के सामने दिया।

जिस पर कोतवाल द्वारा एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए ब्राह्मण परिवार पर मुकदमा लिख कर श्याम जी मिश्रा ,राम जी मिश्रा को जेल भेज दिया गया बाकी ब्राह्मण परिवार में जिन्हें चोटें आईं न तो उनका मेडिकल कराया गया और ना ही उनकी तहरीर ली गयी !

आदर्श मिश्रा के गले का वो निशान जो रस्सी से घोंट देने कोशिश की गयी थी वो ना तो अपर पुलिस अधीक्षक को दिखाई दिया और ना ही वरिष्ठ पत्रकार कैलाश नाथ वर्मा को, अब सवाल ये उठता है की आखिर खुले में शौच करने से मना करना गुनाह कैसे साबित हुआ जबकि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ शौचालय बनवाने के लिए प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करती है। वर्दी की आड़ में अथवा पत्रकारिता के दबाव में परिवार का उत्पीड़न होता देख सिविल कोर्ट अधिवक्ता उग्रसेन मिश्रा के आवाहन पर अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार तिवारी अथवा ब्राह्मण महासभा के उपाध्यक्ष पंकज कुमार पाण्डेय ने गाँव जा कर ब्राह्मण परिवार से पूरी सच्चाई को जानने के बाद वर्मा परिवार का भी हाल जाना अथवा आर्थिक मदद देने के लिए हाथ बढ़ाया तो परिवार ने मना कर दिया ! जिससे यह स्पष्ट हो जाता है की उन्हें उक्त लोगो का भरपूर संरक्षण मिला हुआ है और होगा भी क्यों नही सरदार पटेल नाम से बनी संस्था के नाम बिरादरी के लोगों से चंदे वसूले जा रहे हैं !रसीदें काट कर उन्हें संरक्षण की गांरटी दी जाती है ! जिसे निभाते हुए पुलिस महकमे के दो सिपाही वर्मा परिवार की सुरक्षा में तैनात भी कर दिए गए हैं जो पूरी ठाट बाट से बिछी चार पाई और टेबल फैन के आगे बैठ कर सुरक्षा प्रदान करते दिखाई दिए।

ये केवल नमूने मात्र हैं जनपद में वसूले गए चंदों से संस्था के नाम जमीन भी खरीदी जा चुकी है।

खैर संस्था और संघठन चलाना बुरी बात नही है, किन्तु किसी जाति विशेष को टारगेट करना अथवा समाज में बिखराव की स्थिति उतपन्न करना कानूनन अपराध है और ये अपराध कानून के रखवाले जनपद गोंडा के अपर पुलिस अधीक्षक तथा उनके सहयोगी खुले आम करते नजर आ रहे है ! महज अपने निजी स्वार्थों के लिए ब्राह्मणों पर अत्याचार करके व समाज में जातिवाद का जहर घोल कर उपद्रव की स्थिति के जिम्मेदार सरकार की छवि को धूमिल करने में कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहते है इसका नमूना आशीष पटेल द्वारा मुख्यमन्त्री को भेजा गया पत्र गवाही देता है।

दोनों परिवारों का हाल जानने के बाद जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार तिवारी ने कहा की परिस्थित को देख कर यह स्पष्ट है की पुलिस और पत्रकार मिल कर ब्राह्मण परिवार का उत्पीड़न कर रहे हैं ! जो की सम्वैधानिक पदों का खुले आम दुरूपयोग है ! जिसे हरगिज बर्दाश्त नही किया जाएगा वहीं ब्राह्मण महा सभा के उपाध्यक्ष पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा की पूरे प्रकरण से डी.आई.जी देवी पाटन मण्डल को अवगत कराने के बाद यदि उत्पीड़न बन्द नही हुआ तो जनपद में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा साथ ही उन्होंने यह भी कहा की किसी भी संघठन का उद्देश्य केवल अपने जाती वर्ग के लिए नही बल्कि पूरे समाज के कल्याण के लिए होने चाहिए और अगर पुलिस की वर्दी पहन कर महेंद्र कुमार नेता गिरी और राजनीति करना चाहते हैं तो उन्हें अपनी वर्दी उतार देनी चाहिए। रही बात पत्रकार कैलाश नाथ वर्मा की तो वक्त आने पर उन्हें भी अपने अन्न्याय पूर्ण कृत्यों का दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा जिस जनता को सच्चाई दिखाने के लिए उन्हें बड़ी संस्थाओं ने जिम्मेदारी दी है उनकी आखों में धुल झोंकने का ये कृत्य अधिक चलने नही दिया जाएगा ! इस मौके पर सैकड़ों की तादात में लोग उपस्थित रहे।

प्रदीप शुक्ला

एडिटर: प्रदीप शुक्ला

प्रदीप शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। ये अपनी निर्भीक पत्रिकारिता के लिए जाने जाते हैं। आप कई समाचार पत्रों में व मीडिया माध्यमों पर लिखते हैं।

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