गौ आश्रय केंद्र में मृत पड़े पशुओं को देख कर दुःखी हुए भाजपा नेता, प्रशासन पर उठे सवाल

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मुज़ेहना : गोंडा

क्षेत्र का चर्चित मॉडल गौ आश्रय केंद्र रुद्रगढ़ नौसी की ब्यवस्था ना तो सुधरने का नाम ले रही है और ना ही प्रशानिक अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्यवाही की जा रही है

परिस्थिति ये है की यहां पशुओं की दुर्दशा और मौत की खबरें प्रकाशित होने के बाद अधिकारी आश्रय केंद्र पहुंच कर अपना फर्ज तो निभा देते हैं किन्तु ना तो पशुओं की दुर्दशा पर और ना अनगिनत मौतों की जिम्मेदारी तय कर कार्यवाही की जाती है।

यहां तैनात लोग यह मान बैठे हैं एक मरे या दस अधिकारी आएं चाहे जिलाधिकारी आये कुछ होने वाला नही, इसकी का परिणाम है की मंगलवार को करीब आधा दर्जन पशु मृत अवस्था में पड़े मिले, भाजपा के एक कार्यक्रम के लौटे प्रदेश संयोजक नीती शोध विभाग भाजपा एवं प्रदेश कार्य समिति के सदस्य पुष्कर मिश्रा ने स्थानीय लोगों के निवेदन पर आश्रय केंद्र पहुंच कर ये दर्दनाक मंजर देखा, तो उन्होंने रुधिर शब्दों से इस पापाचार की घोर भर्त्सना की, मौके पर उन्होंने पाया की करीब आधा दर्जन पशु मृत पड़े थे जिन्हें दूसरे जानवर पक्षी नोच रहे थे, आश्रय केंद्र में केवल एक मजदूर मिला, श्री मिश्र ने इस दुर्दशा के जिम्मेदार लोगों की शिकायत भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर करने की बात नही है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा की अगर जिम्मेदारियों का निर्वाहन लोग नही कर सकते तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए, ताकि गौ हत्या जैसे जघन्य आरोपों से बचा जा सके, एक तरफ भाजपा के पदाधिकारी मीटिंग बैठक करके लोगों के बीच सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन और प्रशानिक अधिकारी सरकार की छवि को धुल में मिलाने की पूरी कोशिश करते नज़र आ रहे है।

व्यातव्य है की इससे पहले भी आश्रय के केंद्र में एक ही दिन में पांच पशुओं की मौत की खबर पर विकास खण्ड मुजेहना के खण्ड विकास अधिकारी ने आश्रय केंद्र पहुंच कर सिकरेटरी और ग्राम प्रधान को तलब किया था साथ पुनरावृत्ति होने पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा लिखाने की चेतवानी भी दी थी लेकिन उनकी इस चेतवानी का कोई असर दिखाई नही पड़ा, नतीजन पशुओं के मौत का सिलसिला जारी है, अब तो लोग इसे गौ शाला नही बल्कि वधशाला का नाम भी देने लगे हैं।

 

प्रदीप शुक्ला

एडिटर: प्रदीप शुक्ला

प्रदीप शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। ये अपनी निर्भीक पत्रिकारिता के लिए जाने जाते हैं। आप कई समाचार पत्रों में व मीडिया माध्यमों पर लिखते हैं।

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