डॉक्टर की लापरवाही से दहेज हत्यारोपी बरी, कोर्ट बिफरी

गोंडा। दहेज की मांग को लेकर जलाई गई महिला के इलाज में लापरवाही, पुलिस को सूचित न करने और भारतीय चिकित्सा परिषद के दिशा निर्देशों के उल्लंघन मामले में कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए तल्ख टिप्पणी की है। अस्पताल संचालक व चिकित्सक के कृत्य को गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए सत्र अदालत ने कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (भारतीय चिकित्सा परिषद) को पत्र भेजने का आदेश दिया है। इधर, दहेज हत्या मामले में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपी दोषमुक्त हो गए हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार वजीरगंज थाना क्षेत्र के दीनानाथ यादव ने पांच मार्च 2016 को थाने में तहरीर देकर कहा कि दहेज के खातिर उसकी बेटी गुड़िया को दामाद श्याम बाबू, विशुन दयाल व विमला देवी निवासी ग्राम मेहिया बेलहरिया थाना वजीरगंज ने जलाकर मार दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य संदेह से परे साबित न कर पाने से अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने सभी आरोपियों को शुक्रवार को दोषमुक्त कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से बतौर साक्षी न्यायालय में पेश हुए आरएन पांडेय हॉस्पिटल के संचालक डॉ. राजेश कुमार पांडेय के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की, और कहा कि पीड़िता के अस्पताल पहुंचने की सूचना थाने व पुलिस को न देना, मेडिकल में पीड़िता के जलने के प्रतिशत का उल्लेख न करना अत्यधिक गैर जिम्मेदाराना व विधि विरुद्ध है। डॉक्टर की असंवेदनशीलता से पीड़िता का मृत्युकालिक कथन भी नहीं अंकित कराया गया, जोकि मुकदमे का सार साक्ष्य हो सकता था।

पीड़िता को बिना इलाज के रखना घोर आपत्तिजनक है। यह निश्चित रूप से असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा निर्देशों का उल्लंघन व चिकित्सीय मानकों के भी विरुद्ध है। अदालत ने निर्णय की प्रति मेडिकल काउंसिल को भेजने का आदेश दिया है।

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Author: Hindi Desk