तालिबानी हुकूमत LIVE:अफगानिस्तान में छूटे अमेरिकियों की जान लेना चाहते हैं तालिबानी, घर-घर चला रहे तलाशी अभियान

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न्यूज़ एजेंसियां / हिंदुस्तान 18 हिंदी डेस्क दिल्ली:

अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद भी करीब 100 से 200 अमेरिकी पासपोर्ट धारक वहां छूट गए हैं। तालिबान के लड़ाके इन अमेरिकियों को घर-घर तलाशकर मौत के घाट उतार रहे हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद अफगानिस्तान में छूट गई एक अमेरिकी महिला ने ये बात मीडिया ग्रुप वॉइस ऑफ अमेरिका को बताई है।

25 साल की नसिरा अमेरिका के कैलिफोर्निया की रहने वाली हैं। उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है। नसिरा जून 2020 में परिवार से मिलने और शादी करने अफगानिस्तान गईं थीं। इस समय वे गर्भवती हैं।

नसिरा समझ नहीं पा रही हैं कि अब उनके साथ क्या होगा? क्या वे कभी कैलिफोर्निया जा पाएंगी या उन्हें जिंदगी भर अफगानिस्तान में ही रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे यह तक नहीं जानतीं कि कब तक जिंदा रहेंगी?

अमेरिका ने कहा- अफगानिस्तान में गृह युद्ध छिड़ सकता है

अफगानिस्तान के मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिकी सेना के जनरल मार्क मिल्ले ने कहा है कि अफगानिस्तान में गृह युद्ध छिड़ सकता है और आतंकी संगठन फिर से सिर उठा सकते हैं। अल-कायदा फिर से संगठित हो सकता है, ISIS और दूसरे आतंकी संगठनों की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।

रेजिस्टेंस फोर्स का दावा- 600 तालिबानियों को मार गिराया

पंजशीर में तालिबान और रेजिस्टेंस फोर्स के बीच जंग जारी है। इस बीच रेजिस्टेंस फोर्स ने दावा किया है कि शनिवार को उसने 600 तालिबानियों को मार गिराया और 1000 तालिबानियों ने या तो सरेंडर कर दिया या उन्हें पकड़ लिया गया। वहीं अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान का कहना है कि पंजशीर की राजधानी बाजारक और प्रांतीय गवर्नर के परिसर की ओर जाने वाली सड़कों पर लैंडमाइन होने की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर में अपना अभियान लगभग पूरा कर लिया है। फिलहाल एक जिला और पंजशीर की राजधानी ही उसके कंट्रोल से बाहर है। तालिबान ने पंजशीर के कुछ प्रमुख कमांडर्स को मारने का दावा भी किया है।

अमरुल्लाह सालेह बोले- तालिबान को ISI चला रहा

अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति और रेजिस्टेंस फोर्स की अगुवाई कर रहे अमरुल्लाह सालेह ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा दावा किया है। ब्रिटिश अखबार डेली मेल के लिए लिखे आर्टिकल में सालेह ने कहा है कि तालिबान को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI चला रही है और तालिबानी प्रवक्ता को पाकिस्तानी दूतावास से हर घंटे निर्देश मिल रहे हैं।

सालेह ने ये भी लिखा है कि पंजशीर में तालिबान का सामना करने का फैसला लेते वक्त उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी से कहा था कि अगर तालिबान से लड़ाई में जख्मी हो जाऊं तो मेरे सिर में दो बार गोली मार देना, मैं तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करना चाहता।

तालिबान ने कहा- 2-3 दिन में नई सरकार का ऐलान हो सकता है

अफगानिस्तान में सत्ता को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में लड़ाई छिड़ने की रिपोर्ट है। अफगानिस्तान की वेबसाइट ‘पंजशीर ऑब्जर्वर’ के मुताबिक हक्कानी नेटवर्क की फायरिंग में तालिबान का को-फाउंडर मुल्ला बरादर घायल हो गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बरादर का इस समय पाकिस्तान में इलाज चल रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। दूसरी भास्कर के सूत्रों ने बरादर के घायल होने की रिपोर्ट को आधारहीन बताया है। तालिबान का कहना है कि 2-3 दिन में नई सरकार का ऐलान किया जा सकता है। इसके लिए पंजशीर के पूरी तरह कब्जे में आने का इंतजार किया जा रहा है। साथ ही कहा है कि कुछ पदों को लेकर भी मतभेद हैं।

पंजशीर में तालिबान का साथ दे रही पाकिस्तानी फौज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजशीर में जारी जंग में पाकिस्तान के सैनिक तालिबान का साथ दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पंजशीर में मारे गए एक पाकिस्तानी सैनिक का आई-कार्ड भी मिला है। बता दें पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने और उसे बढ़ावा देने के आरोप काफी समय से लगते रहे हैं और अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के पीछे भी पाकिस्तान का हाथ होना बताया जा रहा है।

तालिबानी सरकार की कमान आतंकियों को दिलवाना चाहता है पाकिस्तान

अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के ऐलान से पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद के काबुल पहुंचने को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस बीच अफगानिस्तान की पूर्व सांसद मरियम सोलाइमनखिल ने कहा है कि ISI चीफ काबुल इसलिए पहुंचे हैं ताकि आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के नेता को तालिबानी सरकार का प्रमुख बनवा सकें और मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को प्रमुख बनने से रोक सकें।

मरियम ने ये भी कहा है कि तालिबानी गुटों और मुल्ला बरादर के बीच कई मुद्दों पर असहमति है और बरादर ने अपने लोगों को पंजशीर में चल रही जंग से दूर कर लिया है। बता दें कि मरियम के बयान से पहले तक ये अटकलें थीं कि मुल्ला बरादर ही तालिबानी सरकार का प्रमुख होगा।

काबुल एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानें शुरू

काबुल एयरपोर्ट से एरियाना अफगान एयरलाइंस ने तीन शहरों- हेरात, मजार-ए-शरीफ और कंधार के लिए उड़ानें शुरू कर दी हैं। काबुल में तालिबानी कब्जे के बाद उड़ानें बंद कर दी गई थीं। सिर्फ दूसरे देशों की सेनाओं के विमान ही लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे थे, लेकिन 31 अगस्त को अमेरिकी सेना के काबुल एयरपोर्ट छोड़ने के बाद उड़ानें पूरी तरह बंद हो गई थीं। अब कतर से आई टेक्निकल टीम ने एयरपोर्ट ऑपरेशन में आ रही तकनीकी खामियां दूर कर दी हैं और उड़ानें शुरू की जा रही हैं।

काबुल में प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर तालिबान के हमले

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ महिलाओं का विरोध-प्रदर्शन शनिवार को हिंसक हो गया। काबुल में महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठा रहीं एक्टिविस्ट्स को तालिबानियों ने आंसू गैस छोड़कर रोकने की कोशिश की। दो दिन से प्रदर्शन कर रहीं इन महिलाओं का कहना है कि नई सरकार में उनकी भागीदारी होनी चाहिए और अहम भूमिका मिलनी चाहिए।

काबुल में महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान तालिबान ने उन पर जानलेवा हमला भी किया। महिला कार्यकर्ता नरगिस सद्दात ने आरोप लगाया कि शनिवार को महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान तालिबान ने उनसे मारपीट की। उनके चेहरे पर चोट के निशान भी हैं।

नरगिस ने बताया कि तालिबानियों ने उनके चेहरे पर बंदूक की बट से हमला किया। जिसके बाद उनके चेहरे से खून निकलने लगा। टोलो न्यूज के मुताबिक तालिबान ने मार्च निकाल रही महिलाओं को राष्ट्रपति भवन की ओर जाने से रोका और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े। कई पत्रकारों ने भीड़ पर फायरिंग का भी आरोप लगाया है।

भारत ने कहा- तालिबान को पालने वाले पाकिस्तान पर नजर रखनी होगी

अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान के हालात पर अमेरिका और भारत नजर बनाए हुए हैं। साथ ही कहा कि अफगानिस्तान के पड़ोसी पाकिस्तान ने तालिबान का समर्थन किया है और वह तालिबान को पालता रहा है। ऐसी कई बातें हैं जिनसे साबित होता है कि पाकिस्तान ने तालिबान की मदद की है, उन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर नजर रखनी होगी। श्रृंगला ने ये भी कहा कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों की अफगानिस्तान में बेरोक-टोक आवाजाही और उनकी भूमिका चिंताजनक है। हम सतर्कता से इस पर भी नजर रखेंगे।

हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

एडिटर: हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

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