दिव्यांग बच्चों को दिया जा रहा बाहर का खाना: लाखों खर्च पर बचपन डे केयर सेंटर में हो रही लापरवाही, बच्चों को नहीं मिल रहा पौष्टिक

गोंडा में प्रदेश भर में सरकार मंडल स्तर पर बचपन डे केयर सेंटर का संचालन कर रही है। इसे अब जिले स्तर पर खोलने की कवायद हो रही है। वर्ष 2018 में नौ मंडलों के साथ देवीपाटन मंडल मुख्यालय गोंडा में स्कूल की स्थापना पुलिस लाइन के किनारे की गई। इसमें तीन से सात साल के 60 बच्चों का नामांकन किया गया है। इसमें 20 श्रवण बाधित, 20 दृष्टि बाधित तथा 20 मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई व देखरेख की जाती है।इन बच्चों को पढ़ाने व सामाजिक रूप से मजबूत बनाया जाए।

18.50 रुपए है एक बच्चे का खर्च

एक अभिभावक ने बताया कि जो वाहन लगे हैं। वह एक ठेकेदार के हैं और उसी के द्वारा बाहर से पूड़ी और सब्जी पन्नी में भरकर मंगाया जाता है। अधिकांश दिन पूड़ी खिलाई जाती है। सेंटर में पढ़ने वाले इन मासूम बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन खिलाने की व्यवस्था सरकार ने की है। इसीलिए एक बच्चे पर 18.50 रुपये प्रतिदिन खर्च किया जा रहा है। मेन्यू के अनुसार बच्चों को दो दिन पनीर की सब्जी खिलानी है। कैलोरी ब्रेड, दूध भी दिया जाना है। लेकिन ठेके पर चल रहे स्कूल में यह सब कैसे संभव है।

ठेकेदार दे रहा बच्चों को घटिया खाना

इस संबंध में उपनिदेशक दिव्यांगजन एवं सशक्तिकरण विभाग भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जैम पोर्टल के माध्यम से रसोइया का चयन होना है। अभी रसोइए की नियुक्ति नहीं हुई है। इसलिए बाहर से खाना मंगा कर खिलाया जा रहा है। यदि संबधित ठेकेदार की ओर से घटिया खाना खिलाया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि चार वाहन लगे है वह जेम पोर्टल के माध्यम से ही लगाए गए है। वहीं पुलिस लाइन से स्कूल का स्थान परिवर्तन कर आईटीआई रोड पर डा. आर एन पांडे अस्पताल के पास खोला गया है। मात्र 700 मीटर दूर पर खुले स्कूल के सामानों की ढुलाई पर 70 हजार रुपये खर्च दिखा दिया जा रहा है।

डेढ़ लाख में खरीदे गए खिलौने, स्कूल में एक भी नहीं

वहीं बच्चों के खेलने व सीखने के लिए आए खिलौने व सहायक खिलौने भी नहीं दिख रहे हैं। जबकि इनके खरीद पर डेढ़ लाख रुपये खर्च कर दिए गए हैं। बच्चों की दुर्दशा एवं उनके साथ हो रहे खिलवाड़ को अधिकारी भी नजर अंदाज कर रहे हैं। दिव्यांग बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए मंडल स्तर पर संचालित बचपन डे केयर सेंटर में बच्चों को पेटभर भोजन नसीब नहीं हो रहा है। सेंटर में तीन प्रकार के दिव्यांग बच्चों को सम्मानित अवस्था में पहुंचाने के लिए सरकार की बेहतरीन पहल पर पानी फेरा जा रहा है।

पौष्टिक भोजन की जगह दे रहे बाहर का खाना

पौष्टिक भोजन की जगह बच्चों को बाहर से मंगा कर पालीथीन में भरकर पूड़ी और सब्जी खिलाई जाती है। संवेदनशीलता एवं प्यार के भूखे इन बच्चों को भोजन ऐसे परोसा तथा संवेदनशील होकर बच्चों की खाना पकाने के लिए रसोइया, घर दर से चार वाहन की भी व्यवस्था का जरिया बना दिया गया। रसोइया तक अधिकारियों द्वारा सात बार जाता है जिसे देखकर किसी को भी उन्नति के लिए एक समन्वयक से बच्चों को लाने व ले जाने के है। नियम है कि जेम पोर्टल के का पद होने के बाद भी स्कूल में स्कूल का निरीक्षण किया गया गुस्सा आ जाएगा।

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Author: Hindi Desk