नाकामियों छुपाने के लिए विधुत विभाग ने बनाया भय का महौल,कौन करेगा शिकायत?

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गोंडा : धानेपुर

आंधी तूफ़ान से कुछ ही दिनों पहले अनियामित आपूर्ति के विरुद्ध जनाक्रोश पर कानून का हंटर इस कदर चला की कोई अब उपकेन्द्र पर अपनी शिकायत ले कर जाने की हिमाकत नही करता.

दर असल तीन दिन पूर्व आई आंधी तूफ़ान की वजह से धानेपुर क्षेत्र में कई स्थानों पर पेड़ गिरने के साथ साथ विधुत लाइनें भी क्षति ग्रस्त हुयी थीं. इस प्राकृतिक हलचल में सर्वाधिक विधुत लाइन की क्षति पावर हाउस तिराहे पर हुयी थी. उपकेन्द्र के इर्द गिर्द के क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए गोंडा उतरौला मुख्य मार्ग पर डबलपोल पर रखा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर अथवा पोल एक भारी भरकम आम के पेड़ के गिरने की वजह से पूरी तरह ध्वस्त हो गया था इसके साथ ही बालिका इंटर कालेज तक दो तीन और बिजली के खम्भे धराशाई हो गए थे ! तब से इस क्षेत्र की आपूर्ति ठप है. किन्तु इस क्षेत्र की ध्वस्त लाइनों को दुरुस्त कराने के लिए तीन दिन बाद तक कोई विभागीय गतिविधि होती दिखाई नही दे रही है ! क्षेत्र के लोगों में ऊहापोह जैसी स्थिति तो बनी है लेकिन कोई न तो उपकेन्द्र पर जाने की हिम्मत दिखा रहा और ना ही उपकेन्द्र जेई अथवा अन्य किसी अधिकारी से फोन पर फीडबैक लेने की जहमत उठाना चाह रहा है.कुल मिला कर आज के महौल में लोक तन्त्र, दमनकारी सिस्टम से कितना डरा हुआ है, ये एक मात्र बानगी है. सितम सह लेना ही अब समझदार का पर्याय बन चुका है. इस बात को पूरे मनोबल के साथ आमजन मानस को स्वीकार कर लेना चाहिए !

करो या मरो का नारा यदि पुनः जीवंत न हुआ तो इस निष्कर्ष पर पहुंचना की केवल सत्ता ही सर्वोपरि है जनता जनार्दन तो केवल सत्ता तक पहुंचने के लिए केवल एक आदर्श वाक्य के अतिरिक्त कुछ भी शेष नही है।

प्रदीप शुक्ला

एडिटर: प्रदीप शुक्ला

प्रदीप शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। ये अपनी निर्भीक पत्रिकारिता के लिए जाने जाते हैं। आप कई समाचार पत्रों में व मीडिया माध्यमों पर लिखते हैं।

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