यहां दी जाती है खोया से बने राक्षस की बलि, अलौकिक है बांका का माताथान दुर्गा मंदिर

फुल्लीडुमर दुधघटिया नवनिर्मित सड़क पर कटोरिया के पूर्व जमींदार ठाकुर यशवंत सिंह के कचहरी परिसर में माताथान वैष्णवी दुर्गा मंदिर अवस्थित है। विशेषता के कारण उक्त मंदिर जन आस्था का प्रमुख केंद्र है। मनोकामना पूरी होने के बाद 2025 तक अपने खर्चे से पूजा करने वाले श्रद्धालु निबंधित हो चुके हैं। माताथान वैष्णवी दुर्गा मंदिर पहाड़ की तराई में स्थापित है। पूर्व जमींदार ठाकुर यशवंत सिंह एवं उनके पूर्वज कुलदेवी के रूप पूजते आ रहे हैं । माताथान मंदिर में लगातार पूजा की बात से प्रसन्न होकर जमींदार परिवार ने अपनी कचहरी की जमीन मंदिर के लिए दान दे दी। मंदिर का निर्माण 2004 में किया गया है ।

बड़ी विशेषता दूध के बने खोया के राक्षस की बलि देने का प्रचलन है। उक्त परंपरा की शुरुआत भगवान रजनीश के शिष्य त्रिपुरारी सिंह उर्फ ओम शून्यो ने मंदिर स्थापना वर्ष से की है। मानव को अपने अंदर की राक्षसी प्रवृति की बलि चढ़ाने का संदेश देता यह कार्यक्रम है। मंदिर के पुजारी पंडित वरुण कुंवर ने कहा कि स्थापना काल से ही वे इस मंदिर में भगवती की पूजा करते आ रहे हैं। यहां की भगवती काफी जाग्रत हैं। सच्चे मन से जिसने जो कुछ मांगा है, भगवती ने जरूर उनकी इच्छा पूरी हुई है।

मंदिर कमेटी के सचिव कामेश्वर साह ने बताया कि मंदिर में माता महारानी के साथ दुर्गा माता की पूजा होती है। जबसे माता की पूजा शुरू हुई है ,समाज में शांति व आपसी प्रेम बढ़ा है । यहां तीन दिनों तक मेला का आयोजन होता है।

जगतपुर दुर्गा मंदिर पहुंचना होगा सुगम

संवाद सूत्र, बांका: शहर के जगतपुर दुर्गा मंदिर तक जाने के लिए लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए शुक्रवार को नप के चेयरमैन संतोष कुमार सिंह ने दुर्गा मंदिर के मेन गेट से पीपील पेड़ होते हुए आशीष रंजन सिन्हा के घर तक 280 फीट पीसीसी रोड का उद्धाटन किया। इसका निर्माण तीन लाख की लागत से कराया गया है।चेयरमैन ने कहा कि शहर में विकास का काम तेजी से हो रहा है।

जगतपुर दुर्गा मंदिर तक आने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसको देखते हुए इस सड़क का काम तुरंत कराया गया। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि जहां कही भी रोड और नाला का काम अधूरा है, उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा रहा है।

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Author: Hindi Desk