यूपी के प्रत्येक गांव का ड्रोन कैमरे से क्यों बन रहा फोटो नक्शा? सिद्धार्थनगर में भी काम शुरू

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परीक्षण के तौर पर सिद्धार्थनगर की नौगढ़ व बांसी तहसीलों के चार चार गांव चिन्हित किये गये, नौगढ़ (सदर) तहसील से शुरुआत
-गोरखपुर, बस्ती, देवीपाटन आदि मंडलों के सभी जिलों में भी योजना पर काम जल्द होगा प्रररम्भ
नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर- उत्तर प्रदेश के प्रत्येक गांव का अलग-अलग फोटो नक्शा बनाने का काम शुरू हो गया है। इस नक्शे के लिए अभिलेख के बजाये ड्रोन कैमरे का सहारा लिया जा रहा है। इसमें सिद्धार्थनगर जिले के भी सभी गांव शामिल हैं। पायलट योजना के तहत इसमें जिले की बांसी व नौगढ़ तहसीलों के चार चार गांव चयनित किये गये हैं। दोनों तहसीलों में इस पर अमल शुरू हो गया है। जल्द ही जिले के सभी गांवों का फोटो नक्शा बनाने का काम शुरू हो जायेगा। जिले में कुल 2326 गांवों का फोटो नक्शा बनेगाा।

इस योजना के तहत आसमान में उड़ने वाले ड्रोन में कैमरे की सहायता से पूरे गांव का सीमांकन होगा। आबादी के हर एक घर का और सडंक, नाली, ग्राम समाज की जामीन की पूरी तरह साफ और स्पष्ट तस्वीर खींची जायेगी। गांव में बने खाद गड्ढों व पोखरे तालाबों के फोटो भी स्पष्ट खींचे जायेंगे।

क्यों बनाया जा रहा फोटो नक्शा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक फोटों नक्शा आने वाले दिनों में जनता के लिए लिये बहुत फायदेमंद साबित होगा। नक्शे के फोटो के आधार पर सबके मकान, सहन जमीन, नाली, खड़ंजा आदि स्पष्ट रहेंगे। भविष्य में यदि कोई किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करता है, अथवा सरकारी भूमि, खाद गड्ढा व तालाब आदि पर अतिक्रमण करता है तो ड्रोन से बने फोटो नक्शों के आधार पर समस्या का हल करके दोषी को दंडित किया जा सकेगाा। क्यों कि हर गांवों का फोटो नक्शा क्षे़त्र के जिम्मेदार अधिकारी और पुलिस के पास उपलब्ध रहेगा। किसी पेचीदा मामले का हल करते समय समय भूलेख विभाग द्धारा बनाये गये कागजी नक्शों की मदद ली जाएगी।

भूमि सम्बंधी अपराधों की रोक थाम होगी?

इस सम्बंध में प्रशासनिक सू़त्रों का कहना है कि यह प्रदेश सरकार का क्रान्तिकारी कदम है। इससे दबंगों की जमीनों पर अवैध कब्जे की कोशिश कामयाब नहीं हो पायेगी। यही नहीं जब विवादों के निपटारे का यह अनोखा फार्मूला अमल में आयेगा तो भूमि विवाद का लेकर मरपीट और हत्या की घटनाओं पर अंकुश लगेगा और कमजोर वर्ग के ग्रामीण को बहुत लाभ होगा। हालांकि कुछ लोग इसकी मंशा पर संदेह भी जताते हैं। उनकी दलील है कि योजना तो अच्छी है, मगर इसे अमल में तो यही अफसर ही लायेंगे। ऐसे में वह इसमें भी गरीब के साथ धोखधड़ी करने में न चूकेंगे। इसलिए सरकार द्धारा अफसरों की बेइमानी पर लगाम लगा कर ही इस योजना का लाभ कमजोर तबके को दिया जा सकता है।

अपर जिलाधिकारी ने क्या कहा?

इस बारे में जिले के अपर जिलाधिकारी सीतारम गुप्ता ने बताया कि पायलट योजना के तहत सदर और बांसी तीसील के सजनी, केवटलिया, बंजरहा खुर्द, गेल्हाडाड़ी, साड़ी कलां, व साड़ी खुर्द मिश्रौलिया तौफीर व बनौली गांवों का फोटो नक्शा बना कर प्रशासन को भेजा जा रहा है। वहां से आदेश आते ही सभी 2326 गांवों की फोटोग्राफी शुरू हो जायेगी।

पूर्वांचल के हर जिलों में लागू है पायलट योजना

खबर है कि इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सिद्धार्थनगर जिला समेत महाराजगंज, बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, संतकबीरनगर व बस्ती आदि जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर शुरुआत कर दी गई है। आज कल में ड्रोन गांवों के ऊपर उड़ान भरने लगेंगे। वस्तव में सरकार का यह क्रान्तिकारी कदम है। बशर्ते नीचे के अधिकारीगण इसमें भ्रष्टाचार के कीटाणु प्रवेश न करा सकें तो।

मुकेश कुमार

एडिटर: मुकेश कुमार

Hindustan18-हिंदी में सम्पादक हैं। किसान मजदूर सेना (किमसे) में राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी के पद पर तैनात हैं।

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