ये हम ननद भाभी का मामला है!

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Sanyukta Tyagi

“भाभी……जरा अपनी वो सफेद वाली चप्पल मुझे दे दो आज कॉलेज में फंक्शन है और वह मेरी ड्रेस के साथ मैच करेंगी”। “अरे देने वाली क्या बात है….. कमरे में रखी है जा कर ले लो! “रसोई में चाय बनाती हुई रिया ने अपनी ननद पीहू को कहा। रिया की शादी पिछले ही साल साहिल से हुई है ,परिवार में सास नीलम, ससुर अरविंद और ननद पीहू है । अरविंद जी व्यापारी हैं और साहिल भी अपने पिता के साथ हाथ बटाँता है। नीलम जी एक सुलझी हुई महिला हैं। रिश्तो को कब छूट देनी है और कब लगाम कसनी है…. उन्हें बखूबी पता है। दोनों बच्चों साहिल और पीहू की परवरिश उन्होंने संस्कारों के साथ की है……रिया भी अच्छी लड़की है।कुल मिलाकर परिवार में प्यार भरा माहौल है ।”भाभी……. भाभी कहां हो?? “क्या हुआ पीहू ?कैसा रहा तुम्हारा फंक्शन?? रिया ने कमरे से बाहर आते हुए पूछा।” अरे भाभी फंक्शन तो अच्छा था…… बस थोड़ी सी गड़बड़ हो गई! “लड़खड़ा कर चलती हुई पीहू ने जवाब दिया।”क्या हुआ??””भाभी! नाचते हुए मेरा पैर मुड़ गया और आपकी चप्पल टूट गई””चप्पल टूट गई?? तुम्हें पता है ना यह चप्पल मुझे सबसे ज्यादा पसंद थी!”रिया का गुस्सा एकदम सातवें आसमान पर पहुंच गया…..अपने गुस्से के सामने उसे यह भी नहीं याद रहा की पीहू के पैर में चोट लगी है और उसने गुस्से में पीहू को उल्टा सीधा कहना शुरू कर दिया।

पीहू अचरज से भाभी को देख रही थी क्योंकि आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि रिया ने इस तरह से उससे या परिवार में किसी और से बात करी हो! रिया बड़बडाती हुई टूटी चप्पल लेकर अपने कमरे में चली गई और आंखों में आंसू भरे पीहू वहीं बैेठ सोचने लगी…… आखिर एक चप्पल टूटने पर भाभी इतना गुस्सा क्यों हो रही है? गलती मेरी ही है मुझे उनसे चप्पल लेनी ही नहीं चाहिए थी! और इस तरह सोचते सोचते न जाने कितने ही अच्छे बुरे विचार उसके मन में आते जाते रहे। नीलम जी उस समय घर पर नहीं थी किसी काम से बाजार गई हुई थी जैसे ही वह वापस आई. …..उन्होंने पीहू को आँसू पोंछते हुए पाया।”क्या हुआ बेटा? क्यों रो रही हो? “”कुछ नहीं मां!अपने आंसू छुपाने की कोशिश करते हुए पीहू ने कह तो दिया लेकिन कोई बेटी कितनी भी कोशिश करें मां से अपनी परेशानी नहीं छुपा सकती। “ऐसे कैसे कुछ नहीं हुआ!बताओ मुझे क्यों परेशान हो? और तुम्हारा फंक्शन कैसा रहा?””माँ फंक्शन अच्छा था पर मेरे पैर में चोट लग गई….. नाचते हुए पैर मुड़ गया!” “अच्छा तो इसलिए परेशान है” नीलम जी ने उसके पैर को देखते हुए कहा…… “चल मैं इस पर दवाई लगा देती हूं ,आराम मिलेगा।” “ठीक है मां!”उदास पीहू ने उठते हुए नीलम जी को जवाब दिया।नीलम जी अनुभवी महिला थे उन्होंने गौर से उसका चेहरा देखा और बोली”पीहू मैं तेरी मां हूं! तेरे चेहरे पर जो दर्द है…..वह इस चोट का नहीं है।

मुझे बता….. क्या हुआ?””कुछ नहीं मां! “इतनी देर में रिया अपने कमरे से निकल आई…. पीहू को नीलम जी से बात करते देख मन ही मन सोचने लगी…… जरूर पीहू मेरी शिकायत कर रही होगी!
नीलम जी रिया को देखते ही समझ गई कि रिया गुस्से में है और जरूर ननद भाभी के बीच कोई बात हुई है। घर में बड़ी होने के नाते यह उनका कर्तव्य था कि अगर बच्चों में आपस में कोई अनबन है तो वह उसे जाने और उसका हल निकाले। उन्होंने पीहू को वही बैठने के लिए कहा और रिया से बोली”रिया बेटा…..देखो पीहू के पैर में चोट लगी है, तुम जरा मेरे कमरे से दवाई लेकर आ जाओ! “नीलम जी के इतना कहते ही रिया को अपनी गलती का एहसास हो गया कि मैंने चप्पल के लिए पीहू को इतना सुना दिया लेकिन यह तो ध्यान ही नहीं दिया कि उसके पैर में चोट भी लगी है।

रिया चुपचाप दवाई लेकर आ गई और बैठकर पीहू के पैर में लगाने लगी…… नीलम जी ने एक बार फिर पीहू और रिया दोनों से पूछा”तुम दोनों के बीच क्या हुआ है ? “पीहू और रिया दोनों ने एक दूसरे को देखा….. दोनों की आंखें नम थी।रिया ने नजरे नीचे झुका ली….. उसे उम्मीद थी कि अब पीहू माँ को सारी बात बता देगी ! लेकिन पीहू ने नीलम जी से कहा “मां……ये हम ननद भाभी का मामला है! आप क्यों परेशान होती हो? “पीहू के इतना कहते ही रिया पीहू के गले लग गई और उससे माफी मांगने लगी।नीलम जी शांत होकर दोनों को देख रही थी….उन्होंने इस बारे में दोबारा पूछना जरूरी नहीं समझा! लेकिन रिया ने नीलम जी को सारी बात बता दी…..कैसे एक चप्पल टूटने पर वो पीहू पर भड़क गई थी। सारी बात सुन नीलम जी मंद मंद मुस्कुरा रहीं थी।

“चलो तुम दोनों ननद भाभी का मामला है तो आपस में निबटो…. मैं जरा चाय बना कर लाती हूं, कुछ और खाना हो तो बता दो!रिया और पीहू ने एक दूसरे की तरफ देखा….. पीहू धीरे से बोली “भाभी अच्छा मौका है! पकौड़े बनवा लें?ये नीलम जी के दिए संस्कार ही थे की पीहू ने मां से शिकायत ना करके संयम से काम लिया। पीहू के इस संयम और समझदारी भरे रवैये के कारण ही रिया को अपनी गलती का एहसास हो पाया…….ननद भाभी एक दूसरे की सबसे अच्छी सहेली हो सकती है,वह साथ हँसेंगी और लडेंगी भी! यदि कोई तीसरा उन दोनों के रिश्ते में हस्तक्षेप ना करें तो वह अपने रिश्ते को खुद ही सजा सकती हैं…..कितनी ही बार ऐसा होता है कि घर के बड़े किसी एक का पक्ष लेकर उन दोनों के रिश्ते में दरार डाल देते हैं,जो सही नहीं है । मेरी व्यक्तिगत राय है किन्ही भी दो व्यक्तियों के रिश्ते में तीसरे का हस्तक्षेप उचित नहीं है!यदि पीहू ने घर में घुसते ही मां से रो-रोकर शिकायत करी होती तो नीलम जी कितनी ही समझदार क्यों ना थी….उन्हें रिया पर गुस्सा आ ही जाता और रिया जो की पहले से ही गुस्से में थी अपने सास और ननद पर और ज्यादा नाराज हो जाती लेकिन पीहू के एक समझदारी भरे कदम ने ना सिर्फ रिश्तों को कमजोर होने से बचाया बल्कि भविष्य के लिए और मजबूत बना दिया।मेरी स्वरचित और मौलिक कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताएं ।
धन्यवाद!
संयुक्ता त्यागी

मुकेश कुमार

एडिटर: मुकेश कुमार

Hindustan18-हिंदी में सम्पादक हैं। किसान मजदूर सेना (किमसे) में राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी के पद पर तैनात हैं।

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