श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज के शोध केन्द्र द्वारा ‘नई शिक्षा नीति’-2020 :

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गोंडा : यूपी

कार्यान्वयन की चुनौती एवं संभावनाएँ, विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। पूरे देश में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में चर्चाएँ-परिचचाएँ, गोष्ठियाँ बहसें चल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘नई शिक्षा नीति’-2020 जारी करते हुए समय देश के प्रबुद्धजनों से ऐसी अपेक्षा भी की है। इसी अनुक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से शिक्षा नीति के अलग-अलग आयामों पर कांफ्रेंस, वर्कशाप, वेबिनार किए जाने का निर्देश दिया है। इसी निर्देश के परिणामस्वरूप श्री लाल बहादुर शास्त्री कालेज ने इस महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार कर परिसंवााद किया। राष्ट्रीय वेबिनार के प्रारम्भ में डाॅ0 वंदना सारस्वत, प्राचार्य श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज ने समारोह का उद्घाटन वक्तव्य देते हुए अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया एवं आयोजक मंडल की सराहना की। उन्होंनंे नई शिक्षा नीति को क्रांतिकारी परिणाम लाने वाला कहा। समय के साथ चुनौतियाँ बदलती रहती हैं, पुरानी शिक्षा नीति नए समय की चुनौतियों से सामना नहीं कर पाती। राष्ट्रीय वेबिनार के समन्वयक डाॅ0 शैलेन्द्र नाथ मिश्र, अध्यक्ष, शोध केन्द्र ने अपने वक्तव्य में आमंत्रित अतिथियों एवं सभी प्रतिभागी शिक्षकों, शोधार्थियों के प्रति साधुवाद ज्ञापित करते हुए नई शिाक्षा नीति-2020 को परिवर्तन कामी चेतन से युक्त बताया। राष्ट्रीय वेबिनार के आयोजन सचिव डाॅ0 राम समुझ सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से इस शिक्षा नीति को अभूतपूर्व कहा। उन्होंने कहा कि बाल मनोविज्ञान, युवाओं के बहुविध संघर्ष और देश के सर्वांगीण विकास को इस शिक्षा नीति में विशेष ध्यान रखा गयाा है।
डाॅ0 शिव शरण शुक्ल, अध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज ने विषय-प्रवर्तन करते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति राष्ट्र की आत्मा, राष्ट्रीयता, संस्कृति, भाषा और इस महादेश की विशाल परंपरा का समावेश करती हुई देश को आगे ले जाने की महान संकल्पना से अनुप्रेरित है। हमें उम्मीद है कि इसके क्रियान्वयन से देश की तस्वीर बदलेगी। पूर्व प्राचार्य एवं भूगोलविद डाॅ0 डी0 के0 गुप्त ने विस्तार से शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी नीति को लागू करने की नीयत अच्छी हो तभी वह अपेक्षित परिणाम दे सकती है। ‘क्रियान्वयन’ अत्यन्त महत्वपूर्ण है। नीति कोई भी हो, शिक्षा से जुड़े। जब तक देश के सभी हितधारकों की मनःस्थिति सकारात्मक न हो, तब तक वांछित परिणाम नहीं मिल पाते। डाॅ0 पूणेश नारायण सिंह, अध्यक्ष, बी0एड0 विभाग, हीरालाल राम निवास, पी0जी0कालेज, संत कबीर ने इस संबंध में कहा कि सिद्धांत और व्यवहार में हमेशा फर्क होता है। यह फर्क जितना कम हो, समाज उतना अच्छा होता है। उन्होंने कहा है कि विडंबना है कि डी0एस0 कोठारी समिति की सिफारिशों को ही ठीक से लागू किया गया होता तो आज तमाम आसन्न चुनौतियाँ बचती ही नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस शिक्षा नीति का भी अगर क्रियान्वयन ठीक ढंग से नहीं किया गया तो ‘ढाक के तीन पात’ की तरह व्यवस्था थोड़े-बहुत अंतर के साथ बनी रहेगी। कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन में शिक्षाशास्त्र के आचार्य, पूर्व प्राचार्य, भटौली डिग्री कालेज, गोरखपुर डाॅ0 सूर्यपाल सिंह ने सूत्र रूप में अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि हमें पूरे विश्व से अच्छी आदतें लेकर अपने को बेहतर बनाना होगा।
हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि डिग्री काॅलेजों को यथास्थितिवाद तथा धिसे-पिटे शिक्षण तरीकों को छोड़कर नवोन्मेषी होना होगा। पुस्तकालय, वाचनालय सुबह आठ बजे खुलकर देर रात तक खुले रहें। पुस्तकालयों को आधुनिकीकृत किया जाए। तरह-तरह की बहानेबाजी खत्म हो। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अगर यह सब नहीं बदला तो सरकार दुनिया के कई देशों की तरह अध्यापकों को नौकरी से निकालेगी। बदलती दुनिया के साथ कदमताल करती हुई यह शिक्षा नीति नई महत्वपूर्ण शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, व्यावसायिक परिवर्तन संभव करेगी ऐसा मुझे विश्वास है।
कार्यक्रम के अंत में डाॅ0 जितेन्द्र सिंह, मुख्य नियंता श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज नें सभी अतिथियों-प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
राष्ट्रीय वेबिनार के सह समन्वयक डाॅ0 राजीव अग्रवाल ने व्यवस्था में लगे हुए सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय वेबिनार के सह आयोजन सचिव डाॅ0 वी0सी-एच0एन0के0 श्री निवासा राव ने बताया कि कार्यक्रम में व्यक्त वक्ताओं के विचारों के निष्कर्ष क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा शासन को प्रेषित किए जाएँगे। कार्यक्रम की संयन्नता हेतु डाॅ0 राव ने सभी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। शोध केन्द्र के सचिव डाॅ0 जय शंकर तिवारी ने तकनीक का सफल प्रबंधन किया !

प्रदीप शुक्ला

एडिटर: प्रदीप शुक्ला

प्रदीप शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। ये अपनी निर्भीक पत्रिकारिता के लिए जाने जाते हैं। आप कई समाचार पत्रों में व मीडिया माध्यमों पर लिखते हैं।

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