देश के प्रसिद्ध 10 प्राचीन गणेश मंदिर जिनकी पूजा करने से होती है, भक्तो की मनोकामना पूर्ण

देश के प्रसिद्ध 10 प्राचीन गणेश मंदिर जिनकी पूजा करने से होती है , भक्तो की मनोकामना पूर्ण

भगवान गणेश हिंदुओं के सबसे प्रिय और पूज्यनीय देवताओं में से एक है जिन्हें एकदंत, विघ्न हरण, दुखहर्ता और विनायक जैसे अन्य कई नामों से पुकारा जाता है। भगवान गणेश देवता शिव और पार्वती के पुत्र हैं जिन्हें सौभाग्य, सफलता, शिक्षा, ज्ञान, बुराइयों का नाश करने वाला और भक्तो की मनोकामना पूर्ति के लिए जाना जाता है जिस वजह से देश विदेश से हजारों श्रद्धालु भारत के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में दर्शन के लिए आते है । भारत में यूं तो कई सारे प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर हैं, जिनकी प्रसिद्धी और प्रताप दूर दूर तक फैला है। जहाँ हर साल लाखो श्रद्धालु एकदंत के दर्शन और मनोकामना पूर्ति के लिए आते है ।
हम आपको भारत के प्रमुख गणेश मंदिर के बारे में बताने जा रहें है जहाँ हर श्रद्धालु को अपने जीवन में एक बार जरूर आना चाहिए और दर्शन करने चाहिए –

1 सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई

महाराष्ट्र राज्य के मुंबई में स्थित सिद्दिविनायक मंदिर भारत में गणेश के सबसे प्रमुख मंदिर में से एक है। इस मंदिर की दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान है जिसकी वजह से देश-विदेश से लोग श्री गणेश भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। 1801 में लक्ष्मण विठू और देउबाई पाटिल द्वारा निर्मित करवाये गये इस मंदिर में भगवान गणेश की एक मूर्ति स्थापित है जिसके पीछे एक बहुत खास कहानी है। इस मंदिर का नाम सिद्दिविनायक इसलिए पड़ा क्योंकि इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति की सूड दाई ओर मुड़ी होती हैं और सिद्धि पीठ से जुड़ी है। भगवान के शरीर से ही इस मंदिर का नाम सिद्दिविनायक हुआ है। इस मंदिर में आने वाले भक्तों को गणेश के ऊपर अटूट विश्वास होता है उनका मानना है कि भगवान उनकी मनोकामना पूरी करेंगे। बता दें कि यह मंदिर मुंबई के सबसे धनी मंदिरों में से एक है, जहां पर प्रतिदिन भारी संख्या में लोग आते हैं ।

2 श्रीमंत दगदूशेठ हलवाई गणपति मंदिर

श्री सिद्धिविनायक मंदिर के बाद महाराष्ट्र में दूसरा सबसे लोकप्रिय मंदिर है, जो भगवान गणपति को समर्पित है। यह मंदिर पुणे में स्थित है जहाँ देश भर से बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। यह मंदिर भारत में सबसे धनी मंदिरों में से एक है और अपने आंतरिक डिजाइन और इसकी स्वर्ण मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, जिसे मंदिर का सबसे सुंदर हिस्सा माना जाता है। इस राजसी मंदिर का निर्माण श्रीमंत दगुशेठ हलवाई ने करवाया था, जो पेशे से मिठाई बनाने वाले थे, जब उन्होंने अपने बेटे को प्लेग में खो दिया था।

3 कनिपकम विनायक मंदिर चित्तूर –

कनिपकम विनायक मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुपति से लगभग 75 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह मंदिर 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोथुंगा चोल द्वारा लोगों की परेशानियों को दूर करने और धर्म की स्थापना के लिए बनाया गया था । भारत के प्राचीन गणेश मंदिर में से एक है, जो अपनी ऐतिहासिक संरचना और आंतरिक डिजाइन के लिए जाना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से उपासक भगवान गणेश की पूजा करने के लिए कनिपकम विनायक मंदिर जाते हैं, जिनकी मूर्ति के माथे पर तीन रंग हैं, सफेद, पीला और लाल।

4 मनाकुला विनयगर मंदिर पांडिचेरी –

मनाकुला विनयगर मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिर में से एक है जिसका निर्माण फ्रांसीसी क्षेत्र पांडिचेरी के दौरान किया गया था जो 1666 साल पहले का है । इस राजसी इमारत का नाम एक तालाब (कुलम) के नाम पर रखा गया है जो मंदिर के अंदर समुद्र के किनारे से उड़ाए गए रेत के साथ स्थित था। इस मंदिर से एक चमत्कारिक घटना भी जुड़ी हुई है जिसके अनुसार माना जाता है की मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा को कई बार समुद्र में फेंका गया था, लेकिन यह हर दिन उसी स्थान पर फिर से प्रकट हो जाती, जिसके बाद से यह स्थान भक्तों के बीच प्रसिद्ध और आस्था का केंद्र बन गया और आज इस दिव्य मूर्ति के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु आते है।

5 मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर –

जयपुर में एक पहाड़ी पर स्थित मोती डूंगरी मंदिर राजस्थान के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है जो मोती डूंगरी पैलेस से घिरा है। भगवान गणेश को समर्पित मोती डूंगरी गणेश मंदिर का निर्माण 1761 में सेठ जय राम पल्लीवाल की निगरानी में किया गया था। मोती डूंगरी मंदिर का निर्माण राजस्थान के उत्तम पत्थर के साथ 4 महीने की समयावधि में पूरा हुआ था जो अपनी वास्तुकला और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से व्यापक रूप से प्रशंसित है। मोती डूंगरी गणेश मंदिर तीन गुंबदों से सुशोभित है जो भारत में तीन प्रमुख धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर, जटिल पत्थर की नक्काशी के अलावा, संगमरमर पर बनाई गई पौराणिक छवियों के साथ अपने उत्कृष्ट अक्षांश के लिए जाना जाता है, जो कला-प्रेमियों के लिए एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करते हैं। एक आंकड़ों के मुताबिक यहाँ हर साल लगभग 1.25 लाख से भी अधिक श्रद्धालु मंदिर आते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान गणेश बुध के देवता हैं, इसलिए हर बुधवार का दिन मंदिर परिसर के अंदर एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में एक शिव लिंग भी है जो महा शिवरात्रि की रात को खुलता है। जो मंदिर को अद्वितीय बनाता है क्योंकि यह भारत का एकमात्र गणेश मंदिर है जिसे भगवान शिव के भक्तो द्वारा देखा जाता हैं।

6 मधुर महागणपति मंदिर केरल –

10वीं शताब्दी में निर्मित, यह प्रसिद्ध गणेश मंदिर मधुवाहिनी नदी, कासरगोड, केरल के तट पर स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिर है जो भक्तो के बीच आस्था का केंद्र होने के साथ साथ अपनी स्थापत्य सुंदरता और ऐतिहासिक संरचना के लिए भी जाना जाता है। इस भगवान गणेश मंदिर का निर्माण कुंभला के मिपादी राजाओं द्वारा किया गया था। कहा जाता है कि मधुर महागणपति मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति न तो मिट्टी और न ही पत्थर से बनी है । कथाओं के अनुसार एक बार टीपू सुल्तान ने इसे नष्ट करने के लिए मंदिर पर हमला किया, लेकिन वह इस श्री गणेश मंदिर की शक्ति के कारण यहां से छोड़कर चला गया।

7 रणथंभौर गणेश मंदिर-

राजस्थान में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के अन्दर स्थित रणथंभौर गणेश मंदिर एक ऐसा मंदिर है जो श्रद्धालुयों के साथ साथ प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव उत्साही लोगों द्वारा देखा जाता है। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान में से एक रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के बीच में स्थित होने के कारण यहाँ आने वाले सभी पर्यटक ‘त्रिनेत्र गणेश’ नामक तीन आंखों वाले भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए यहाँ आते है। यह खूबसूरत मंदिर इतना लोकप्रिय है कि देश के विभिन्न कोनों से लोग भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए यहाँ आते है और शादी के कार्ड भेजते हैं। ऐसा माना जाता है कि मंदिर को लगभग हजारों साल पहले भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह का निमंत्रण मिला था और तब से लोग भगवान को अपनी शादी का निमंत्रण भेजते हैं। बता दे रणथंभौर गणेश मंदिर लगभग 6500 साल पुराना है, जिस वजह से इसे भारत के सबसे प्राचीन गणेश मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान आयोजित होने वाले गणेश मेले के दौरान 3 – 4 दिनों में लगभग दस लाख लोग यहाँ आते हैं जो अपने आप में अद्वितीय है।

8 गणेश टोंक गंगटोक –

गणेश टोंक गंगटोक में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिर है जिसकी गिनती भारत के प्रमुख गणेश मंदिर में की जाती है । हरी-भरी घाटियों और माउंट खंगचेंदज़ोंगा के सुंदर दृश्यों के बीच यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसी वजह से हर साल हजारों की संख्या में लोग सौभाग्य के देवता माने जाने वाले भगवान गणेश की पूजा करने और इसके शांति प्रिय परिवेश में समय व्यतीत करने के लिए आते है। यदि आप अपनी यात्रा के लिए भारत के प्रसिद्ध गणेश मंदिर सर्च कर रहे है तो गणेश टोंक भी आपके लिए बेहतर विकल्प हैं जहाँ आप गणेश जी के दिव्य दर्शन के साथ साथ आसपास के सुन्दर परिदृश्यों को देख सकते है।

9. रॉकफोर्ट उची पिल्लेयर कोइल मंदिर, तिरुचिरापल्ली

7 वीं शताब्दी में निर्मित  भगवान गणेश का यह मंदिर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के तप्पकुलम में 83 मीटर ऊंची चट्टान पर स्थित है। कहानी के अनुसार  रावण को मारने के बाद, भगवान राम ने राजा विभीषण को भगवान रंगनाथ की मूर्ति भेंट करते हुए कहा था कि यह मूर्ति जब भी स्थापित की जाएगी, आधार बनाऐगी।  लेकिन लंका जाते समय भगवान गणेश ने उन्हें भ्रमित कर मूर्ति को कावेरी के तट पर रख दिया। इससे व्यथित होकर राजा विभीषण भगवान गणेश के पीछे दौड़े। रॉकफोर्ट के इस स्थान पर, भगवान गणेश जी ने अपना असली रूप प्रकट किया और राजा विभीषण को उनसे माफी मांगनी पड़ी।

10 बड़ा गणपति मंदिर इंदौर

बड़ा गणपति मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में स्थित है जिसे अपना नाम भगवान गणेश की मूर्ति के आकार के कारण मिला है। भारत के प्रसिद्ध गणपति मंदिर में से एक बड़ा गणपति मंदिर में विराजित गणेश की ऊंचाई 25 फीट हैं और यह दुनिया में भगवान की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक है। मूर्ति देश के प्रमुख तीर्थ स्थानों से चूना पत्थर, गुड़, ईंटों और पवित्र मिट्टी और पानी के मिश्रण से बनी है। इंदौर शहर में एक लेन के अंत में स्थित, बड़ा गणपति एक मामूली दिखने वाला मंदिर है, लेकिन यह भगवान की प्रतिमा की विशालता के आधार पर महत्व रखता है।

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अनुराग बघेल

एडिटर: अनुराग बघेल

मेरा नाम अनुराग बघेल है। मैं बिगत कई सालों से प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ा हूँ। पत्रकारिकता मेरा पैशन रहा है। फिलहाल मैं हिन्दुस्तान 18 हिन्दी में रिपोर्टर ओर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं।

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