रामकथा के मर्मज्ञ स्वामी राजेश्वरानंद जी का जीवन परिचय

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स्वामी राजेश्वरानंद जी का जीवन परिचय

एट न्याय पंचायत जिला जालौन उत्तर प्रदेश के पचोखर निवासी स्वामी राजेश्वरानंद जी का जन्म 22 सितंबर 1955 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा 1967 में गांव के ही नेहरू जूनियर हाईस्कूल में हुई। पढ़ाई के दौरान भी वे कक्षा में अपनी मधुर आवाज में चौपाइयां सुनाया करते थे जिससे गांव के लोग व शिक्षक आश्चर्यचकित रहते थे। रामायण में रुचि रखने के कारण स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद अपने गुरु स्वामी अविनाशी राम के साथ जाकर उनकी कथा में सहयोग करने लगे।

युवावस्था में उनके मुख से रामकथा सुनकर लोग स्वयं को काफी आनंदित महसूस करते थे। कई बड़े व्यवसाई घरानों ने इन्हें अपना गुरु माना। जिसके बाद इनकी रामकथा देश से लेकर विदेश तक पहुंचने लगी। रामायणी के निमंत्रण पर ही भजन गायक विनोद अग्रवाल व अनूप जलोटा ने भी उनके गांव में भजन संध्या प्रस्तुत की है।

रामकथा मर्मज्ञ मुरारी बापू भीराजेश्वरानंद जी के मुख से निकलने वाली रामकथा को काफी पसंद करते थे। परिवार के करीबियों की मानें तो बापू तो उन्हें अपना छोटा भाई मानते थे। माना जाता है कि जब वे कथा सुनाने के लिए मंच पर आसीन होते थे तो हनुमान जी की ऐसी कृपा बरसती थी कि उनके मुख से निकलने वाली रामकथा भक्तों को आनंदित कर देती थी।

शिव मंदिर बनाने की तैयारी कर रहे थे
उन्होंने मारीशस, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैंड आदि देशों में रामकथा सुनाई। वे अपने गांव में भगवान शंकर का एक भव्य मंदिर बनाने की योजना को अंतिम रुप देने में जुटे थे लेकिन वह उनके जीतेजी पूर्ण नही हो सका। उन्होंने पैतृक गांव पचोखरा में नि:शुल्क अस्पताल बनवाया है। इसमें रविवार के दिन बाहर से आए डाक्टर लोगों की जांच कर उन्हें नि:शुल्क दवाएं देते हैं। स्वामी जी कथा में मिली हुई दक्षिणा से सार्वजनिक कैंप लगाकर गरीबों को कपड़े व खाने पीने का सामान भी समय-समय पर बांटते रहते थे।

पुत्री भी कर रही है रामकथा
अमरदान के तीन पुत्र थे। सबसे बड़े राजेश रामायणी, दूसरे विवेक शर्मा व तीसरे मुन्ना शर्मा हैं। राजेश्वरानंद की पुत्री अर्चना उपाध्याय भी अपने पिता की तरह रामकथा कहती हैं जबकि पुत्र गुुरुप्रसाद इस समय प्रधान बनकर गांव की सेवा कर रहे हैं।

देश-विदेश में प्रख्यात कथावाचक राजेश्वरानंद उर्फ राजेश रामायणी जी का 10 जनवरी 2019 को हृदयगति रुकने से स्वर्गवास हो गया। जब उन्होंने अंतिम सांस ली तब भी वे राम कथा की यात्रा पर रायपुर छत्तीसगढ़ में राम कथा प्रवचन करने गए थे।

स्वामी राजेश्वरानंद सरस्ववती के जाने का समाचार पाते ही रामायणी के गांव से लेकर पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। जिले के सांसद, विधायक व अधिकारी एवं सभी दलों के जिलाध्यक्ष उनके घर पहुंचने लगे। और जैसा कि सभी होता है अंत्येष्टि कर दी गई।
महान कथाकार स्वामी राजेश्वरानंद जी को शास्त्रीय संगीत पर अच्छी पकड़ थी। अपनी संगीतमयी रामकथा के लिए विदेशों में भी जाने जाते थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी रामायणी व उनकी राम कथा से काफी प्रभावित थे।

मुकेश कुमार

एडिटर: मुकेश कुमार

Hindustan18-हिंदी में सम्पादक हैं। किसान मजदूर सेना (किमसे) में राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी के पद पर तैनात हैं।

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