सचेत परंपरा का जीवन परिचय-Biography of Sachet-parampara

पढ़ना नहीं चाहते? तो इसे सुनें..

सचेत परंपरा के बारे मैं आजकल सभी जगह सोशियल मीडिया पर छाए हुए है। आप ने भी इहने कही न कही देखा होगा। तो चलिए आज इनके बॉयग्राफी के बारे में जानेगे। सबसे पहले जानते है इनका जीवन परिचय।

सचेत परंपरा का जीवन परिचय

जैसा की आप सभी ने भी देखा होगा जो ज्यादा ट्रेंड पर चल रहा है। जिसका नाम है मीरा के प्रभु गिरिधर नागर और यह भजन आपने किसी ना किसी के स्टेटस में जरूर सुना होगा बहुत सारे लोगों के मन में यह शंका है कि यह दोनों कौन हैं जो इस गाने में दिख रहे हैं। शिव तांडव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जो लोगो के द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है । इसके साथ फिल्‍म कबीर सिंह का सुपरहिट गाना ‘बेखयाली’ तो आपने सुना ही होगा, इस गाने को कंपोज किया है, म्‍यूजिक कंपोजर्स सचेत-परंपरा की जोड़ी ने। इस गाने को सचेत परंपरा ने कम्पोज़ किया है।
आखिर कौन है ये सचेत-परंपरा ? सचेत का पूरा नाम सचेत टंडन है और परंपरा का पूरा नाम परंपरा ठाकुर है।
आपमें से बहुत से लोगों ने इन्‍हें यूट्यूब पर Short Videos में देखा होगा और उनकी Short Videos देखकर आपके मन में भी आया होगा यह प्‍यारा सा सुंदर कपल कौन हैं, आप भी इन्हे जानने के उत्सुक होंगे ।

जो लोग इन्‍हें नहीं जानते, उनमें से बहुत से लोगों को ये लगता होगा कि ये दोनों शार्ट वीडियो क्रियेटर है , लेकिन ऐसा नहीं है । पर आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ये प्रोफ़ेस्सिनल म्यूजिक कंपोजर ,म्यूजिक और म्यूजिक डायरेक्टर हैं।सचेत टंडन और परंपरा ठाकुर बॉली‍बुड की पहली मेल-फीमेल म्‍यूजिक कंपोजर जोड़ी हैं।जो अपने यूनिक म्‍यूजिक से यूट्यूब और बॉलीवुड में काफी वाहबाही बटोर रही है।
कबीर सिंह का ही ‘मेरे सोणया’ गाना भी इसी जोड़ी ने कंपोज किया है। ये अपने शार्ट वीडियो और रील्‍स से हाल ही में काफी ज्‍यादा पापुलर हो रहे हैं।

तो आइये पहले बात करते हैं परंपरा ठाकुर के बारे में

परंपरा ठाकुर एक प्रोफेशनल म्यूज़िक कंपोजर ,सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर हैं।परंपरा ठाकुर का जन्‍म 28 फरवरी 1992 को दिल्‍ली के नोयडा शहर में एक ठाकुर परिवार में हुआ था।इनकी वर्तमान में उम्र 29 साल है।परंपरा ठाकुर का जन्‍म दिल्‍ली में हुआ था। इसलिए उनकी प्रारंभिक स्‍कूली शिक्षा भी दिल्‍ली में हुई , जहॉ तक उन्‍होंने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई की। स्‍कूल के बाद परंपरा टंडन ने दिल्‍ली के ही लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजूऐशन कंपलीट किया।

परंपरा का परिवार

परंपरा ठाकुर के माता-पिता भी संगीत से जुड़े हुये व्‍यक्ति हैं इसलिए वे भी अपने समय में सिंगिंग किया करते थे। परंपरा के पिताजी ने 1991 में नोयडा में एक म्‍यूजिक इंस्‍टीट्यूट खोला था। जो कि नोयडा का पहला म्यूजिक इंस्टीटुए था। जिसमें बहुत सारे बच्‍चे संगीत सीखने आया करते थे। परंपरा के घर में हमेशा से ही संगीत का माहौल रहा है, इसलिए उनको संगीत सीखने में ज्‍यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पडा। वे बचपन से ही बहुत ही तेज दिमाग की थी इसलिए वे अपना स्‍कूल का वर्क समय से पहले ही कर लिया करती थी ,और बचे हुये समय में म्‍यूजिक सीखा करती थी। उनके माता-पिता चाहते थे। कि उनकी बच्‍ची पढ़ाई के साथ-साथ संगीत भी सीखे इसलिए मात्र 03 साल की उम्र में ही परंपरा ठाकुर ने गाना गाना सीख लिया था। संगीत सीखने के लिए वे अपने पापा के Music Institute में ही ट्रेनिंग लिया करती थी। क्युकी परंपरा को भी संगीत में काफी रूचि थी। उन्‍होंने बचपन में ही सोच लिया था कि वे बड़े होकर सिंगर बनेगी, लेकिन उनके माता-पिता का कहना था कि पहले उन्‍हें अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहिए। इसलिए परंपरा ने अपनी ग्रेजुऐशन की पढ़ाई तक संगीत को ज्‍यादा समय न देकर केवल अपनी पढ़ाई पर ही फोकस किया। ग्रेजुऐशन कंपलीट होने के बाद वे पूरी तरह से म्यूजिक लाइन में आ गयी। वर्ष 2015 में परंपरा ठाकुर ने एक टीवी रियालिटी शो ध वौइस् इंडिया में अपने जीवन का पहला ऑडिशन दिया, उस समय वे 23 साल की थी। शो के जजिस को उनकी आवाज इतनी पसंद आयी कि वे अपने पहले ऑडिशन में ही पास हो गयी और उन्‍हें शो के लिए सिलेक्‍ट कर लिया गया और अपनी टीम में शामिल करने के लिए जजिस के बीच में होड़ मच गयी।जब परंपरा ठाकुर से पूछा गया कि वे किसकी टीम में जाना चा‍हती हैं तो उन्‍होंने मीका सिंह की टीम को चुना। लेकिन परंपरा ठाकुर वह शो तो नहीं जीत पायी, पर अपनी आवाज से सबका दिल जीत लेने में जरूर सफल हुई । परंपरा ठाकुर उस शो की टॉप ४ कंसिस्टेंट में रहीं। अब बात करते हैं सचेत टंडन जो कि परंपरा के पति है ।

सचेत टंडन कौन हैं |

सचेत टंडन भी एक प्रोफेशनल म्यूजिक कंपोजर ,सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर हैं और एक फेमस यूटूबेर भी हैं। सचेत टंडन का जन्‍म 17 अगस्‍त 1989 को उत्‍तर प्रदेश के लखनउ शहर में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। सचेत टंडन इस समय 32 साल के हैं। सचेत टंडन का जन्‍म लखनउ में हुआ था। इसलिए उनकी स्कूलिंग भी लखनउ के सेंट फीडेल्‍स कॉलेज से हुई । सचेत टंडन ने अपनी ग्रेजुऐशन लखनउ यूनिवर्सिटी से की। सचेत टंडन के परिवार में कभी संगीत का माहौल नहीं रहा है, क्‍योंकि इनके परिवार में कोई भी संगीत से दूर-दूर तक परिचित नहीं था। पर इन्‍हें बचपन से ही गाना गाने का बहुत शौक था। इनके माता-पिता ने संगीत में रुचि न होने के बाद भी सचेत को कभी संगीत से दूर नहीं किया, बल्कि उनका खूब सपोर्ट किया। और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सचेत को बचपन से ही गाने का बहुत शौक था और वे मन ही मन यह ठान चुके थे कि बड़े होकर वे सिंगर बनेंगे। इसलिए सचेत, स्‍कूल के समय से ही गाना सीखने लगे थे, उनकी संगीत में बहुत ही ज्‍यादा रुचि थी इसलिए उन्‍हें संगीत सीखने में ज्‍यादा समय भी नहीं लगा। स्‍कूल खत्‍म करने के बाद जब सचेत कॉलेज में पहुंचे तो उन्‍होंने अपने कॉलेज का बैंड ज्‍वाइन कर लिया और कॉलेज के फंक्‍शन में गाया करते थे। उन्‍होंने कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही ऑडिशन देना शुरु कर दिया था, पर उनको कहीं भी सफलता नहीं मिली। वे हर बार किसी न किसी कारण से रिजेक्‍ट हो जाया करते थे, जिससे वे काफी निराश और हताश हो गये थे। ध वौइस् इंडिया शो में जाने से पहले कई ऑडिशन में रिजेक्‍ट होने के बाद उन्‍होंने सोचा कि यह मेरा लास्‍ट ऑडिशन है। यदि इसमें भी फेल हो गया तो इसके बाद गाना गाना छोड दूंगा, हो सकता है कि शायद मेरी किस्‍मत में सिंगर बनना न लिखा हो। उह्नोने निश्चित किया एक बार अंतिम कोशिश कर लेता हॅू। ऐसा सोचकर सचेत टंडन ने ध वौइस् इंडिया शो में ऑडिशन दिया और भगवान की कृपा से और उनकी कड़ी मेहनत के कारण जजिस ने उन्‍हें सिलेक्‍ट कर लिया। यह वही शो था, जिसमें परंपरा ठाकुर भी सिलेक्‍ट हो गयी थी। यहीं से दोनों का आपसी परिचय हुआ था। सिलेक्‍ट होने के बाद सचेत टंडन ने हिमेश रेसमिया की टीम को चुना और शो के सेकंड रनर उप रहे।

सचेत परंपरा को एक दूसरे से प्‍यार कैसे हुआ

ध वौइस् इंडिया शो के टॉप 04 में जब ये दोनों पहुंचे, तब सचेत किसी से बात भी नहीं किया करते थे। उसी दौरान एक दिन की बात है परंपरा ने सोचा कि सचेत को उनके सिलेक्‍शन पर शुभकामनायें देना चाहिए। तो उन्‍होंने सचेत से मिलकर उनको विश किया, पर सचेत बताते हैं कि उस समय उनके दिमाग में कुछ और चल रहा था। इसलिए उन्‍होंने परंपरा के साथ बड़ी ही अशिष्‍टता से बात की, जिससे परंपरा को बहुत बुरा लगा और वे रोने लगी। यह देखकर सचेत को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्‍होंने परंपरा को चुप कराया और अपने व्‍यवहार के लिए माफी भी मांगी। उस दिन के बाद सचेत और परंपरा की कभी बात नहीं हुयी। शो खत्‍म हो गया, सब अपने-अपने घर वापस चले गये।


शो खत्‍म होने के लगभग 06 महीने बाद मीका सिंह ने एक पार्टी रखी, जिसमें सचेत तथा परंपरा दोनों आये हुये थे, जहॉ दोनों की नार्मली बातचीत हुयी और दोनों अपने-अपने काम में व्‍यस्‍त हो गये। कुछ दिन बाद दोनों ने आपस में बातचीत करके प्‍लान बनाया कि उन्‍हें साथ मिलकर कवर सॉग, एलबम सॉग वगैरह बनाना चाहिए। इसके लिए दोनों मुंबई आ गये और कवर सांग के लिए दोनों मिलकर मेहनत करने लगे। लगभग एक साल बाद इस जोड़ी को ‘टायॅलेट एक प्रेमकथा’ में गाना गाने का मौका मिला। जिसमें इनके काम को सभी ने बहुत पसंद किया और इनकी जोड़ी म्‍यूजिक कम्‍पोजर एवं सिंगर के रूप में खबरों मे आने लगी। जिसका परिणाम यह हुआ इन्हे साथ में दूसरी बार कि इसके बाद इस जोडी को ‘यमला पगला दीवाना-2’ में गाने का मौका मिला। उसके बाद बत्‍ती गुल मीटर चालू, पल पल दिल के पास में गाने का मौका मिला। लेकिन वर्ष 2019 इन दोनों के लिए बहुत ही लकी साबित हुआ, क्‍योंकि इस साल इन्‍होंने कबीर सिंह फिल्म का ‘बेख्‍याली’ सोंग गाया, जो बहुत ही ज्‍यादा सुपर डुपर हिट हुआ। सचेत बताते हैं कि उनकी और परंपरा की तुननिंग बहुत ही अच्‍छी है, उन्‍हें परंपरा से हर बात शेयर करने की जरूरत नहीं होती है। परंपरा उनकी बात को बिना कहे ही समझ लेती हैं। दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते थे। इसलिए इन दोनों से सोचा कि हमारा प्रोफेशन एक है और हमारे थिंकिंग भी सेम है, इसलिए इन्‍हें आपस में जुड़ने में कोई समस्‍या नहीं हुई ।
सचेत और परंपरा ने मुंबई में एक साथ लगभग 5 साल काम किया। साथ में काम करते-करते इस जोड़ी ने एक साथ जीने का कब फैसला ले लिया, ये इन्‍हें खुद भी नहीं पता और 27 नंवबर 2020 को दोनों ने शादी कर ली।

परंपरा सचेत के गाने |

टॉयलेट एक प्रेम कथा- सुबह की ट्रेन और हंस मत पगली (सेड वर्जन)
भूमि
यमला पगला दीवाना-2
बत्‍ती गुल मीटर चालू
पल पल दिल के पास
मुकाबला
पति पत्‍नी और वो- दिलबरा
कबीर सिंह- बेख्‍याली और मेरे सोणया। जिसके लिए इस जोड़ी को नेशनल और इंटरनेशनल अवार्ड भी मिला है।
छोड देंगे (एलबम)- जिसमें नूरा फतेही से डांस किया है, यह गाना यूट्यूब पर सुपर डुपर हिट हुआ है।

ऐसे ही सचेत परंपरा अपनी जिंदगी के उतार चढाव के साथ साथ कब एक हो गए। इन्हे भी पता नहीं चला और आज जिंदगी के इस मुकाम पर अपनी मेहनत से पहुंचे। ऐसी ही और जानकारियों को पढ़ने के लिए विजिट करते रहे है हिंदुस्तान १८।

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दीप माला गुप्ता

एडिटर: दीप माला गुप्ता

दीप माला गुप्ता रिपोर्टर, एंकर एवं वीडियो न्यूज़ एडिटर हैं। इन्होने जर्नलिजम में डिप्लोमा किया है। आप hindustan18.com के लिए रिपोर्टिंग एवं स्क्रिप्ट लिखने का कार्य करती हैं।

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