जर्जर भवन में चल रही सीआईडी (आईबी) की शाखा

                      जर्जर भवन में चल रही सीआईडी (आईबी) की शाखा

फाइल फोटो-जर्जर भवन सीआईडी (आईबी) की शाखा

,हिण्डौनसिटी ( करौली ) । बेजोड़ खुफिया तंत्र के बूते गहराई तक जडें जमा चुके अपराधों की गुत्थी सुलझाने से लेकर गुप्त सूचनाओं का संकलन कर राज्य सरकार को सतर्क करने वाली सीआईडी (आईबी) उपखंड मुख्यालय पर बीते करीब ढाई दशक से भूमि की तलाश नहीं कर पाई है ।विभिन्न सरकारी महकमों के अधिकारियों का असहयोग कहें, या फिर सीआईडी के स्थानीय कार्मिकों की अनदेखी । जिस कारण करौली जिले के सबसे बडे शहर में सीआईडी को खुद का कार्यालय भवन निर्माण कराने के लिए भूमि का आवंटन नहीं हो सका है । ऐसे में विगत 24 वर्षों के लंबे अर्से से सीआईडी का दफ्तर रेलवे स्टेशन बजरिया स्थित जर्जर हो चुके एक निजी भवन में चल रहा है ।
सूत्रों के अनुसार करौली जिले को सवाईमाधोपुर से अलग होने से पहले मार्च 1997 में हिण्डौन उपखंड मुख्यालय पर सीआईडी (आईबी) की शाखा स्वीकृत की गई थी, तब से लेकर अब तक यह शाखा रेलवे स्टेशन बजरिया में किराए के भवन में चल रही है। सीआईडी में पदस्थ पुलिस कर्मियों ने दर्जनों बार कार्यालय निर्माण के लिए भूमि आवंटन की पत्रावली तैयार करा तहसील कार्यालय के जरिए जिला कलक्टर तक पहुंचाई। लेकिन भूमि की तलाश पूरी नहीं हुई है। कुछ समय पहले ही सीआईडी ने फिर से भूमि की तलाश शुरु की है ।जिसमें हल्का पटवारी से लेकर तहसील के जरिए प्रस्वात की पत्रावली एसडीएम को पहुंची है, लेकिन समय ही बताएगा कि सीआईडी स्वयं का ठिकाना ढूंढ पाती है अथवा नहीं ।

25 लाख का बजट हो गया लैप्स-
सीआईडी के सूत्र बताते हैं कि करीब छह-सात वर्ष पहले सीआईडी (आईबी) की हिण्डौन शाखा को कार्यालय निर्माण के लिए करीब 25 लाख रुपए का बजट गृह विभाग की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया था । यह बजट करीब एक वर्ष तक भरतपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पड़ा रहा । उस समय सीआईडी के स्थानीय पुलिसकर्मियों ने भूमि आवंटन के लिए प्रयास भी किए, लेकिन सिस्टम की अनदेखी के चलते सीआईडी को जमीन नहीं मिल पाई। यही कारण रहा कि, वित्तीय वर्ष की समाप्ति होने पर सरकार से प्राप्त बजट लैप्स हो गया ।

अनुपयोगी पड़े हैं कई भवन, सरकारी भूमि पर हो रहे अतिक्रमण-
उपखंड मुख्यालय पर कई स्थानो पर पुराने सरकारी भवन लंबे समय से खाली पडे हुए हैं । जबकि करौली रोड़ पर सरस डेयरी के समीप, मोहननगर में मुख्य डाकघर के पास, महवा रोड पर वन विभाग कार्यालय के सामने, कैलाश नगर में अंबेडकर छात्रावास के सामने समेत कई स्थानों पर बेशकीमती सरकारी भूमि खाली पड़ी हुई हैं । जिन पर भूमाफियाओं की निगाहें टिकी हुई हैं ।कई भूमियों पर तो अतिक्रमण भी हो रखे हैं ।अगर सरकारी अधिकारी पहल करें तो सीआईडी शाखा समेत परिवहन उप निरीक्षक, महिला एवं बाल विकास विभाग, केन्द्रीय सहकारी बैंक समेत निजी भवनों में संचालित हो रहे कई सरकारी महकमों को खुद का कार्यालय नसीब हो सकते है ।
रिपोटर-जीतेन्द्र मीना, करौली राजस्थान

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अनुराग बघेल

एडिटर: अनुराग बघेल

मेरा नाम अनुराग बघेल है। मैं बिगत कई सालों से प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ा हूँ। पत्रकारिकता मेरा पैशन रहा है। फिलहाल मैं हिन्दुस्तान 18 हिन्दी में रिपोर्टर ओर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं।

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