कोरोना (Covid1-9) के लक्षण / Corona Symtomps & Prevention

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कोरोना के लक्षण, बचाव एवं उपचार

24 घंटे में कोरोना से 3 हज़ार 660 मौते, 1 लाख 86 हजार नए मामले और और रिकवरी केस 2 लाख 59 हज़ार-

इस डाटा को देखकर आपको अंदाजा हो गया होगा की भारत में कोरोना की रफ्तार में अब गिरावट देखने को मिल रही। आज 44 दिनों बाद सबसे कम संक्रमण दर घटकर 9 फीसदी हुआ। आज भी मौत के आकड़ो में गिरावट आयी है, अब तक मौत का आकड़ा 4 हज़ार से ऊपर ही बना हुआ था; लेकिन आज फिर से आकड़ो में गिरावट हुआ है। महामारी के कारण मौतों का आकड़ा तीन लाख तक पहुंच चूका है। रिकवरी रेट पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है इसी के साथ मरीज़ो के ठीक होने की राष्ट्रीय दर तीन लाख के पार यानी 90% ज्यादा हो चुकी है।

अभी 24 लाख 95 हज़ार लोगो का कोरोना संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलो का 9.19 प्रतिशत है; वही संक्रमण मुक्त लोगो की संख्या बढ़कर 2 करोड़ से ज्यादा हो गयी है। 24 घंटे में भारत में 2 लाख 8 हजार नए कोविड-19 केस सामने आए। देशभर में अब सक्रिय मरीज 25 लाख तक, सबसे ज्यादा मामले 7 मई को आये थे, तब ये आकड़ा 4 लाख 14 हज़ार दर्ज किया गया था। देश का कुल केस 2 करोड़ 75 लाख है।

अब कई जगहों पर केसेस में गिरावट देखने को मिल रही और एक्टिव केस में भी कमी आ रही जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली में डेली केसेस ड्राप हो रहे, मंगलवार को मृत्यु दर में कमी देखने को मिली; जबकि कर्नाटक संक्रमण दर के मामले में अभी सबसे आगे 1.3 प्रतिशत बढ़ी है। यहाँ दूसरी लहर में मार्च से मध्य मई तक राज्य के 1.4 लाख बच्चे संक्रमित हुए।

मंत्रालय के अनुशार आठ राज्यों में अभी भी सक्रिय मरीज़ बढे हुए है जिसमे अरुणाचल प्रदेश, असम, लक्षद्वीप, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, तमिलनाडु, और त्रिपुरा शामिल है। इनमे तमिलनाडु और असम दो बड़े राज्य जहा सक्रिय केस ज्यादा है।

कोरोना केसेस भले ही कम हो रहा हो लेकिन ये अपने साथ कई परेशानी लेकर आया है जिससे हमें बहुत सावधान रहने की ज़रूरत है। केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरल शब्दों में दिशा-निर्देश जारी की गयी, जिसमे ये भी आशंका जताई गयी की कोरोना वायरस धूलकणों के ज़रिये 10 मीटर तक हवा में फैल सकता है ये स्टेटमेंट, आई लांसेट अध्ययन के हवाले कही गयी है इसलिए ज़रूरी है की आप मास्क लगा के रहे। ब्लैक फंगस का प्रकोप भी बढ़ते जा रहा। तेलंगाना और बिहार में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया। तभी वाइट फंगस ने भी दस्तक दे के हमारी मुसीबते बढ़ा दी है। ब्लैक फंगस और वाइट फंगस से जुड़ी मुख्या जानकारी आप नीचे स्वाइप कर के पढ़ सकते है।

अब एक नया फंगस गाज़ियाबाद के एक मरीज़ में देखा गया ‘येलो फंगस’, डॉक्टर के अनुशार पहली बार किसी इंसान में ये फंगस पाया गया है, समान्यत ये बीमारी छिपकली और गिरगिट में पाया जाता है; इसे म्युकर-स्पेक्टिक्स कहा जाता है। ये सारी बीमारिया या फंगस नए नहीं है, पहले से मौजूद है और गंदगी के कारण उत्पन होते है; लेकिन अभी इंसानो पर असर करने की वजह है की कोरोना से संक्रमित मरीज़ की इम्युनिटी कम होने के कारण जल्दी इन फंगस के चपेट में आ जा रहे।

इस बीच आयुष मंत्रालय ने कोरोना मरीज़ो के मदद के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की है जिसका टोल फ्री नंबर है 14443. मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया की यह पूरे देश में सप्ताह के सातों दिन सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक काम करेगी। इसके विशेषज्ञ न सिर्फ मरीज़ो को सलाह देंगे बल्कि उपलब्ध होने वाली दवा की जानकारी भी देंगे और नज़दीकी आयुष मंत्रालय की जानकारी भी देंगे।

भारत सरकार का वैक्सीनेशन पर भी जोर है, लेकिन इसकी कमी का भी पता चल रहा। अब 18 वर्ष से ऊपर युवा का भी वक्सीनशन शुरू हो चूका है। भारत में अब तक करीब 19.33 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है। गांवों में भी टीका केंद्र खुलने की तैयारी शुरू हो गयी है।

कोरोना होम टेस्ट किट –

कोरोना की तुरंत जाँच के लिए अब आपको हॉस्पिटल जाने की ज़रूरत नहीं है और न सैंपल कलेक्शन की, अब आप घर बैठे अपना कोरोना टेस्ट कर सकते है। कोविसेल्फ़ नाम की होम टेस्टिंग किट अगले सप्ताह के अंत तक बाजार में उपलब्ध होगी। ICMR ने किट को जाँच के लिए मंजूरी दे दी है। इस कोरोना टेस्ट किट को लेकर एडवाइजरी जारी कर दी गयी है।इसे खरीदने के बाद ऍप डाउनलोड करना होगा और जांच के बाद तस्वीर को एप पर अपलोड करना होता है, इसे 15 मिनट में नतीजे मिलेंगे और इसका दाम 250 रुपये होगा।

एंटीवायरल थेरेपी-

कोरोना के कहर के बीच एक अच्छी खबर ये है की ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गयी नयी एंटीवायरल थेरेपी से वायरस लोड को कम कोरोना का 99.9% फीसदी तक खात्मा किया जाने का दावा किया है। ये थेरेपी फेफड़ो के अंदर कोरोना के कणो का पता कर उन्हें खत्म करने का काम करेगी जिसके कारण बॉडी में दुबारा यह वायरस बन नहीं पायेगा।

एस्पिरिन गंभीर कोविड-19 में मौतों को कम कर सकता है –

एक नए रिसर्च में ये बात सामने आयी है की एस्पिरिन का लो डोज़ कोविद-19 के गंभीरता को कम कर सकता है। अनेस्थिसियोलॉजी के प्रोफेसर जॉनथन चाउ ने कहा है की जैसे की हम क्लॉट और कोविड-19 के बीच का कनेक्शन जानते है, हम जानते है की एस्पिरिन स्ट्रोक और हार्ट अटैक से बचाने के लिए इस्तेमाल होता है। खून को पतला करके, एस्पिरिन थक्के, या थ्रोम्बी का गठन को रोकने में मदद करता है, जो हार्ट, ब्रेन, लंग्स, और ज़रूरी अंगो की अपूर्ति करने वाले ब्लड वेसल्स को ब्लॉक कर सकता है। एस्पिरिन कम दाम का है, आसानी से कही भी मिल सकता है, मिलियन में लोग इसका इस्तेमाल कर रहे ठीक होने के लिए।

क्या रेमडेसिवीर पर भी लगेगा प्रतिबंध ? –

प्लाज्मा थेरेपी पर रोक लगने के बाद, अब रेमडेसिवीर पर भी खतरा मंडरा रहा। गंगा राम हॉस्पिटल के चेयरपर्सन डॉ. डी एस राणा ने मंगलवार को यह बयान दिया की रेमडेसिवीर दवा को भी कोविद गाइडलाइन्स से हटा देना चाहिए जितनी जल्दी हो सके, क्योकि इसका भी कोई सबूत नहीं है की ये कोविद मरीज़ के इलाज में कोई फायदा पंहुचा रहा। जो मेडिसिन कोविद के इलाज में काम नहीं कर रही उसे जारी नहीं रखना चाहिए। फ़िलहाल सरकार या ICMR के तरफ से इसे जुडी कोई बात नहीं हुई है।

हलाकि यहाँ ये ध्यान देने वाली बात है की रेमडेसिवीर इंजेक्शन की इतनी ज़रूरत नहीं है, जितना लोग इसके लिया परेशान हो रहे। WHO ने भी इसे साफ़ शब्दों में कहा की रेमडेसिवीर मरीज़ की जान नहीं बचा सकता बल्कि सिर्फ मॉडरेट कंडीशन में ट्रीटमेंट के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता और न मिले तो ज़रूरी नहीं की यही इस्तेमाल हो।

प्लाज्मा थेरेपी पर रोक-

कई रिसर्च में यह सामने आया है की अब प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीज़ो को कोई फायदा नहीं हो रहा, जिसके बाद सरकार और ICMR ने इसे कोरोना गाइडलाइन्स से हटाने का फैसला कर लिया है। हेल्थ प्रोफेशनल ने कहा की प्लाज्मा थेरेपी से जुड़ी गाइडलाइन्स उपलब्ध सबूतों पर आधारित नहीं है. कुछ शुरुआती सबूत भी सामने रखे गए जिसके अनुशार, बेहद कम इम्युनिटी वाले लोगो को प्लाज्मा थेरेपी देने पर नूट्रलीज़िंग एंटीबाडीज कम बनती है, और अलग वैरिएंट्स सामने आते है। वही ब्रिटेन में 11000 लोगों पर हुए टेस्ट के मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी कोई चमत्कार नहीं करती. पिछले साल ICMR ने भी कहा था ये थेरेपी कोरोना के ट्रीटमेंट और मृत्यु दर कम करने में कारगर नहीं है . इन सभी चीज़ो को देखते हुए और डॉक्टर्स और साइंटिस्ट के सलाह पर इसे हटाने का निश्च्य किया है।

देसी दवा 2 डीजी लॉन्च –

इतने दिनों से चर्चा में रहे DRDO की कोरोना की दवा अब फाइनली लॉन्च हो गयी है। कोविद रोधी दवा 2-डीजी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इसे लांच किया। रेडी लेबोरेटरी द्वारा तैयार किया गया ये दवा की पहली खेप जारी कर दी गयी है। यह ऑक्सीजन के ज़रूरत को कम करेगी। इस दवा को पाउडर के उपलब्ध रहेगी जिसे पानी में मिलकर मरीज़ को पीना है। हालांकि ICMR ने गुरूवार को बताया की ये दवा सिर्फ हलके और मध्यम लक्षण वाले मरीज़ो पर काम करेगा, गंभीर मरीज़ो पर नहीं। ये बताया की ये दवा कोई नयी नहीं है, पहले इससे कैंसर जैसे बीमारी में उपयोग किया जाता था, कोरोना काल में अब कोरोना के इलाज के लिए काम आ रहा।

वैक्सीनेशन में तेजी –

वैक्सीन की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने इसकी उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला किया है, हलाकि विदेशी वैक्सीन पर बात तो चल ही रही है और उनमे से एक स्पुतनिक वि शुरू हो चूका है; पर देश में उत्पादन के लिए सरकार ने 5 कंपनियां को निर्धारित किया है, जिसमे 3 सरकारी और 2 निजी कंपनियां शामिल है। ये कोवाक्सिन का उत्पादन करेंगी, जो की सितंबर से सात करोड़ टीके बनाएगी। इसके अलावा भारत बायोटेक अपना उत्पादन जारी रखेगा।

भारत में वैक्सीनेशन का कार्य प्रारंभ होने के बीच चिंता की एक बात यह भी है कि कोरोना के नए मरीजों में डबल म्युटेंट वायरस भी पाया गया है। दिसंबर 2020 के बाद कोरोना केस में कुछ कमी देखी जा रही थी। परंतु अचानक से इस बीमारी का एक नया स्ट्रेन देखा गया। जिसका असर सबसे पहले महाराष्ट्र और केरल में देखा गया। यह नया स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है।

अभी तक सामन्या कोरोना से लड़ना मुश्किल हो रहा था और यह नया स्ट्रेन जिसमे कोरोना का और भी ताकतवर वायरस बताया जा रहा है । आम भाषा में समझा जाए तो वायरस ज्यादा घातक होने के लिए समय के साथ अपनी संरचना को बदलता रहता है। महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश में डबल म्यूटेंट वायरस मिल रहा है।

नए लक्षणों वाले मरीजों की अधिकता

कोरोना के दूसरी लहर में नए लक्षण वर्तमान में सामने आ रहे जैसे आँखों का गुलाबी/लाल होना , सुनने में परेशानी, पेट या आंत की समस्या, जीभ में जलन जिसे कोविड टंग कहा जा रहा , विशेषज्ञों का कहना है की इन लक्षणों को हलके में नहीं लेना चाहिए।

वर्तमान में कोरोना के लक्षण

ब्लैक फंगस –

देश में अब तक 5,500 ब्लैक फंगस के केस आ चुके है, और 126 लोगों की मौत हो चुकी है।
ब्लैक फंगस को विज्ञान भाषा में म्युकर्मीकोसिस कहते है, इस बीमारी ने मरीज़ो से लेकर डॉक्टरों तक की तकलीफे बढ़ा दी है। गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश में ब्लैक फंगस के कई मामले सामने आये है। ये फंगस मिटटी, खाद, सड़े फल या सब्जियों में पनपता है जो की हवा और इंसान के बलगम में भी पाया जा सकता है।

ये नाक से , मिटटी के संपर्क या खून के ज़रिये शरीर में दाखिल हो सकता है और त्वचा, दिमाग, और फेफड़ो को निशाना बना सकता है , इसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक हो सकती है। इसके इलाज में मरीज़ो के आँख तक निकलने की नवबत आ सकती है।

भारत में ज्यादातर वो मरीज़ इसके शिकार हो रहे जो डायबिटीज से पीड़ित है या जिन्हे कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉयड दिए गए है।

कई राज्यों में विशेष रूप से मधुमेह से पीड़ित कोरोना के कई मरीज़ में ब्लैक फंगस होने के मामले सामने आये है.

ICMR ने सुझाव दिया है की जिन कोविद पेशेंट को डायबिटीज है और जिन्होंने स्टेरॉयड के ओवरडोज़ लिए है वो अपना खास ख्याल रखे और किसी भी तरह की परेशानी पर डॉक्टर से संपर्क करे।

ब्लैक फंगस को ठीक करने वाली दवा लिपोसोमल अम्फोटेरिसिन बी, जो की एंटीफंगल ड्रग है उसकी भी कमी हो रही है। महाराष्ट्र राज्य में 1.50 लाख ड्रग ज़रूरत है लेकिन सिर्फ 16000 ड्रग मिल रहे और भी राज्यों की यही हालत है और कई राज्य में ड्रग्स के स्टॉक ही नहीं बचे जैसे की ओडिशा।

महाराष्ट्र में अब तक 1500 से ज्यादा, राजस्थान में 500 से ज्यादा, MP में 230 और हरयाणा में 180 से ज्यादा मरीज़ पाए गए।

ब्लैक फंगस के कारण –

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उन लोगों में संक्रमण का पता लग रहा है जो कोरोना से ठीक हो रहे या हो चुके है।

ICU में ऑक्सीजन थेरेपी से गुज़र रहे लोग, जहा हुमिडिफायर का इस्तेमाल किया जाता है, नमी के संपर्क में आने से जोखिम अधिक होता है। इसलिए ऑक्सीजन थेरेपी के लिए साफ़ और स्टेराइल पानी का उपयोग करने के लिए सिफारिश किया जा रहा।

रीसेंट स्टडी ओवर ब्लैक फंगस –

एक ताजा स्टडी में की मुकरमीकोसिस के अनुबंध वाले कोविद मरीज़ो के 101 मामलो का विश्लेषण किया गया, ये रेयर है लेकिन गंभीर फंगल संक्रमण है। इस स्टडी में ये पाया गया की उनमे से 79 संक्रमित आदमी थे। और 83 गंभीर डायबिटीज मेलिटस से जूझ रहे थे। वही इस स्टडी में यह देखा गया की 101 में से 31 लोगों की मौत फंगल इन्फेक्शन के कारण हुई।

वही डॉक्टर्स भी अपनी पूरी कोशिश कर रहे की समय रहते मरीज़ में इसकी पहचान कर इलाज शरू किया जाये जैसे- जबलपुर में डॉक्टर ने कोविद मरीज़ में ब्लैक फंगस को डिटेक्ट करने के लिए नेसल एंडोस्कोपी x-ray का इस्तेमाल किया।

ब्लैक फंगस के लक्षण –

नाक बंद होना
नाक से पपड़ी, खून या काले रंग का पदार्थ निकलना
आँख और सिर में दर्द
चेहरे पर सूजन
धुंधला दिखना
दांत में दर्द
खून की उल्टी
स्किन इन्फेक्शन
सांस लेने में परेशानी
चेहरा सुन्न हो जाना या मुंह खोलने में परेशानी।
कोविद मरीज़ में ये कंडीशन ब्लैक फंगस के रिस्क को बढ़ा सकते है-

डायबिटीज (उनकंट्रोलड)
डायबिटीज मेलिटस (इम्पोर्टेन्ट रिस्क)
स्टेरॉयड के इस्तेमाल के कारण इम्यून सिस्टम का कमज़ोर होना
लम्बा ICU / अस्पताल में रहना
पोस्ट ऑर्गन ट्रांसप्लांट/ कैंसर
वोरिकोनेज़ोल थेरेपी (थेरेपी जो की गंभीर फंगल इन्फेक्शन को ठीक करने के लिए इस्तेमाल हो) .

वाइट फंगस –

ब्लैक फंगस खतरा अभी सर पर मडरा ही रहा की वाइट फंगस ने आग में घी का काम किया। वाइट फंगस भी कोरोना के मरीज़ो में देखा जा रहा, इसके नए केसेस पटना, बिहार में पाए गए है।

वाइट फंगस के इन्फेक्शन का कारण लो इम्युनिटी बताई जा रही, इसमें सफाई सबसे ज्यादा ज़रूरी है।

अगर इसके लक्षण की बात करे तो डॉक्टर ने कहा है की इसके लक्षण कोरोना वायरस जैसे ही है लेकिन टेस्ट में नेगेटिव आ रहा है। डॉक्टर ने बताया की ये फंगल इन्फेक्शन CT स्कैन या X-ray द्वारा पता किया जा सकता है।

वाइट फंगस न सिर्फ फेफड़ो को बल्कि शरीर के दूसरे भाग जैसे की नाख़ून, स्किन, पेट, किडनी, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट्स और मुँह को भी प्रभावित कर रहा।

वाइट फंगस से किसे नुकसान –

जिसका इम्यूनिटी कम है
कैंसर मरीज़
जिस मरीज़ ने कोरोना के दौरान लम्बे वक़्त तक स्टेरॉयड ली है, जो मरीज़ लम्बे समय से ऑक्सीजन सपोर्ट पर है।

ब्लैक फंगस और वाइट फंगस में ज्यादा खतरनाक कौन ?

सर गंगाराम अस्पताल के ENT सर्जन डॉ. मनीष मुंजाल ने हिंदुस्तान पेपर से बातचीत में बताया की वाइट फंगस ब्लैक फंगस जितना खतरनाक नहीं है ,ब्लैक फंगस जहा शरीर के आंतरिक हिस्सों में हमला करता है, वही वाइट फंगस शरीर के बाहरी भाग पर होता है। वाइट फंगस को घर पर रहकर दवाओं से ठीक किया जा सकता है, अस्पताल जाने की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है; जबकि ब्लैक फंगस में सर्जरी तक की ज़रूरत पर जाती है।

ब्लैक फंगस से मृत्युदर 20 से 80 प्रतिशत है और अगर बात वाइट फंगस की हो तो इसकी सम्भावना बहुत कम है की ये खून तक पहुंचे, ये तभी हो सकता है जब मरीज़ को कोई और घातक बीमारी हो या स्टेरॉयड लिया हुआ हो। डॉक्टर का भी कहना है ये एक आम फंगस है जो कोरोना के पहले भी होता था।

वैसे तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन नवजात शिशु में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है , यह बच्चो में दूध का निप्पल और डायपर के गीलेपन के वजह से होता है और डायबिटीज या कैंसर के मरीज़ को भी वाइट फंगस गिरफ्त में ले सकता है।

वाइट फंगस गन्दी और नमी वाले जगह पर तेजी से फैलता है, इसके लक्षण जीभ या मुँह पर चकते पर जाते है अपनी मर्ज़ी से दवा न ले, ऐसा कुछ दिखे तो तुरंत डॉक्टर को संपर्क करे।

कोरोना वैक्सीन अपडेट –

भारत में स्पुतनिक-वी टीके का उत्पादन शुरू होगी। रसियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फण्ड और भारत की दवा कंपनी पैनेसिया बायोटेक ने सोमवार को भारत में स्पुतनिक-वी कोविद टीके का उत्पादन शुरू करने का घोषणा किया है।

मॉडेर्ना के बाद फ़ाइज़र कोरोना टीका के निर्माता ने भी पंजाब को सीधे टीका देने से मना कर दिया, नोडल अधिकारी विकास गर्ग ने ये जानकारी दी की फ़ाइज़र ने स्पष्ट किया की उनकी नीति के अनुशार वे सिर्फ भारत सरकार के साथ ही समझौता कर सकते है।

भारत का बायोलॉजिकल इ. अपने कैंडिडेट के साथ अब भारत में ही जॉनसन एंड जॉनसन कोरोना वैक्सीन का उत्पादन करेगा, जो वैक्सीन की कमी को पूरा करने में मदद करेगा। जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने भी कन्फर्म किया की वैक्सीन के लिए वो भारत के बायोलॉजिकल इ. के साथ काम करेगा।

भारत का ये कंपनी जो कि हैदराबाद में स्थित है अपने खुद का टीके की 75 से 80 मिलियन खुराक का उत्पादन अगस्त से करने की योजना बना रहा है। बायोलॉजिकल इ. की MD महिमा दतला ने कहा की दोनों प्रोडक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लांट्स पूरी तरीके से अलग है और हम दोनों को एक- दूसरे से स्वतंत्र रूप से उत्पादन करेंगे।

वैक्सीनेशन से ही बचाव संभव

भारत ने कोरोना की रोकथाम के लिए बहुत काम किया है। भारत ही अकेला ऐसा देश है जिसने कोरोना की वैक्सीन को न सिर्फ डेवलप किया बल्कि दूसरे देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध करवाया है । भारत ने अभी तक 2 वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन डेवलप कर ली है और तीसरी रुस्सियन वैक्सीन स्पुतनिक-वि भी आ चुकी है, और अब भारत 5 और वैक्सीन पर काम कर रहा है ।

16 जनवरी 2021 से भारत में वैक्सीनेशन का काम जारी है । इन दोनों वैक्सीन को आपतकालीन वैक्सीन की मंजूरी मिली हुई है । भारत में अब 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीकाकरण प्रारंभ कर दिया गया है। वहीं भारत में 18.22 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है. आदिवासी लोग टीक लेने से मना कर रहे उनका मानना है वैक्सीन लेने के बाद इसके भारी साइड इफ़ेक्ट देखने को मिल रहे, लेकिन वैक्सीन ही एक मात्र उपाय है कोरोना से लड़ने का।

हर समय अलग नए तरीके से वक्सीनशन पर प्रयोग हो रहे जैसे एक नए शोध में पाया गया की टीके के खुराक में अंतर से बुजुर्गो (65 पार वाले लोग)की जान बचाई जा सकती है, जिसे ब्रिटैन में किया गया और 42 हज़ार बुजुर्गो की जान बचाई।

क्यों चिंताजनक है डबल म्युटेंट वायरस

इस तरह के वायरस में एक चिंता की बात यह भी होती है कि यह इम्यूनिटी और दवाओं से लड़ना सीख जाता है। यूके स्ट्रेन के साथ जो बात देखी गई थी, उसका एक म्यूटेशन डबल म्युटेंट वायरस के साथ भी है। यह ज्यादा आसानी से शरीर के अंदर पहुंचकर नुकसान पहुंचाता है। वायरस के तीन रूपों से दूसरी लहर खतरनाक हुई है जिसमें शामिल है बी 117, बी 1618, और बी 1617. वही विशेषज्ञों का कहना है की बी 1617 अधिक संक्रामक है और तेजी से फैलने वाला है।

महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में संक्रमण की भयावह स्थिति के पीछे यही वेरिएंट जिम्मेदार है। देखने में यह भी आ रहा है कि ये वेरिएंट लोगों में और वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा असर करता है, और युवा भी इसकी अधिक चपेट में आ रहे हैं। एक चिंता की बात यह भी है कि चिकित्सकों के संज्ञान में यह भी आया है कि यह वेरिएंट एंटीबॉडी को बाईपास करना भी सीख रहा है।

विदेशी वैक्सीन की जरूरत क्यों
स्पुतनिक वी

स्पुतनिक वि को भारत में मंजूरी मिल चुकी है और CDSCO के मंजूरी के बाद इसका पहला खुराक हैदराबाद में दिया जा चुका है और इसकी दो डोज़ है और एक डोज़ की कीमत 995 रूपए होगी इस हिसाब से दोनों डोज़ की कीमत 1990 रूपए हुई , दूसरा डोज़ तीन हफ्ते से तीन महीने बाद तक लेना है। इसके आने से वैक्सीन की कमी थोड़ी पूरी होगी। भारत में भी इसका उत्पादन जुलाई से शुरू होगा, इसे 6 कंपनी मिलकर बनाएगी।

फ़ाइज़र वैक्सीन

फ़ाइज़र ने भारत को 500 करोड़ रूपए की वैक्सीन देने का एलान किया है, यहाँ पर वैक्सीन के कमी के बाद फ़ाइज़र ने यह ऐलान किया। अगर सब कुछ ठीक रहा तो CDSCO के अप्रूवल के बाद हम भारत में चौथी वैक्सीन भी देखेंगे। हाल ही में अमेरिका के फ़ाइज़र और मॉडेर्ना ब्रांड के कोविद इंजेक्शन की दोनों खुराक लेने वालो में कोरोना से संक्रमित होने का खतरा 94 फीसदी तक कम हो जाता है, यानी संक्रमित का जोखिम सिर्फ 6 फीसदी रह जाता है। यह दावा रियल वर्ल्ड पर आधारित अबतक की सबसे बड़े अध्ययन में किया गया है।

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एडिटर: हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

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