जिलाधिकारी व जनप्रतिनिधि भूल गए कि उनके अधिकार क्षेत्र में विधुत विभाग भी है

पढ़ना नहीं चाहते? तो इसे सुनें..

प्रदीप कुमार शुक्ला की रिपोर्ट
गोंडा- ये तथ्य थोड़ा अजीब ज़रूर है लेकिन ऐसा सत्य है जिसे झुठलाया नही जा सकता है। उपरोक्त की प्रमाणिकता का यदि उल्लेख किया जाए तो सत्यता तक बड़ी आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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आइये, हम बताते हैं कि ऐसा लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

जनपद में लॉकडाउन की शुरुवात के बाद लोगों को अपने घरों में रहने की अपील तो सभी ने की किन्तु घर में गर्मी के सौसम में बिना बिजली के जीवन बिताना कितना कठिन है इस बात पर किसी ने ना तो ध्यान दिया और ना ही लोगों की सहूलियत के लिए कोई सरकारी शेड्यूल अथवा दिशा निर्देश जारी किये गए।

इस दौरान मौसम कई दिनों तक खराब रहा तेज आंधी तूफ़ान और बरसात की वजह से ग्रामीण अथवा शहरी क्षेत्रों की लाइने भी खराब हुयीं कई कई दिनों तक बिजली नही आई शिकायतें होती रहीं, सोशल मिडिया सहित अन्य माध्यमों से जनता की समस्याएं उठाई गयीं जिसका परिणाम मात्र इतना देखने को मिला की संविदाकर्मी अथवा लाइनमैन अपनी तरफ से कोशिश करते रहे की उपभोक्ताओं को बिजली दी जाय किन्तु कभी किसी बड़े अधिकारी अथवा सांसद, विधायक, अथवा जो भी जन प्रतिनिधि होने का शेहरा पहने हुए हैं उन्होंने कभी कोई पहल अथवा विभागीय अधिकारियों की उदासीनता पर अंकुश लगाने की कोशिश नही की, उदाहरण के तौर पर मुज़ेहना ब्लॉक के कस्बा धानेपुर का हाले बयां इस तरह है की यहां का विधुत सब स्टेशन संविदा कर्मियों के ही सहारे रहता है, क्षेत्र की मुख्य बाज़ार धानेपुर के कुछ हिस्सों में विगत कई सप्ताह से लो वोल्टेज अथवा बिजली का कई कई दिनों तक गुल रहना अथवा बार बार ट्रिपिंग होने जैसी समस्या से लोग काफी परेशान रहा करते हैं जिसकी खबरें भी क्षेत्रीय पत्रकारों अथवा समाज सेवी वर्ग के लोगों द्वारा उठाई जाती रहीं हैं किन्तु कभी ना तो यहां के प्रतिनिधियों ने जन समस्या से सरोकार रखा ना ही जिले के आलाधिकारियों ने समस्याओं का संज्ञान लिया।

जिसका परिणाम यह है की आज जब बिजली गुल होती है अथवा अन्य कोई समस्या खड़ी होती है तो तमाम लोग यह टिप्पणी करते मिल जाते हैं की भैया यहां कोई सुनने वाला नही है,ब्यवस्था राम भरोसे चल रही है।

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प्रदीप शुक्ला

एडिटर: प्रदीप शुक्ला

प्रदीप शुक्ला एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। ये अपनी निर्भीक पत्रिकारिता के लिए जाने जाते हैं। आप कई समाचार पत्रों में व मीडिया माध्यमों पर लिखते हैं।

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