फेसबुक पर ‘लाइक’ बना धोखाधड़ी का नया हथियार

फेसबुक पर कोई पोस्ट पसंद आ जाए तो यूजर उसे ‘लाइक’ या ‘शेयर’ करने से पहले एक बार भी नहीं सोचते। वे न तो पोस्ट के स्रोत का पता लगाना जरूरी समझते हैं, न ही उसे ‘लाइक’ या ‘शेयर’ करने वाले लोगों का प्रोफाइल देखना। साइबर ठग फेसबुक उपभोक्ताओं के बैंक अकाउंट में डाका डालने के लिए उनकी इसी लापरवाही का फायदा उठाते हैं। वे भारी संख्या में ‘लाइक’ और ‘शेयर’ किए गए पोस्ट को शॉपिंग से जुड़े इश्तहारों और वायरस युक्त लिंक से बदल देते हैं। तकनीकी भाषा में ‘फेसबुक फार्मिंग’ कहलाने वाली इस तरह की धोखाधड़ी के बारे में बता रही हैं पारुल श्रीवास्तव…
‘फेसबुक फार्मिंग’ से रहें सावधान
फेसबुक पर उपलब्ध ‘लाइक’, ‘कमेंट’, ‘रिएक्शंस’ और ‘शेयर’ जैसे फीचर न सिर्फ किसी पोस्ट की लोकप्रियता दर्शाते हैं, बल्कि यूजर की नजरों में उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने का बेहतरीन जरिया भी साबित होते हैं। हालांकि साइबर ठग अब फेसबुक उपभोक्ताओं के बैंक अकाउंट में सेंधमारी के लिए भी इन फीचर का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे साइट पर पहले तो ऐसे दिलचस्प पोस्ट डाल रहे हैं, जिन्हें ज्यादा से ज्यादा लोग ‘लाइक’ और ‘शेयर’ करें। फिर जब ये पोस्ट वायरल हो जाते हैं तो इन्हें वायरस से लैस लिंक और आकर्षक ऑफर वाले इश्तहारों से बदल दे रहे हैं। वायरस युक्त लिंक जहां यूजर के कंप्यूटर से संवेदनशील डाटा चुराने की कूव्वत रखते हैं, वहीं आकर्षक ऑफर वाले इश्तहार उन्हें न सिर्फ खरीदारी, बल्कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां साझा करने के लिए भी उकसाते हैं। टेक जगत में इस तरह की धोखाधड़ी को ‘फेसबुक फार्मिंग’ का नाम दिया गया है।
नफरत भड़काने का जरिया
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक अराजक तत्व किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने के लिए भी ‘फेसबुक फार्मिंग’ का सहारा ले सकते हैं। दरअसल, साधारण से पोस्ट को भारी संख्या में ‘लाइक’ और ‘शेयर’ मिलने के बाद वे इन्हें ऐसी टेक्स्ट, फोटो व वीडियो सामग्री से बदल सकते हैं, जो हिंसा की आग सुलगाने के लिए काफी हैं।
सोच-समझकर शेयर करें
किसी फेसबुक पोस्ट को ‘लाइक’ या ‘शेयर’ करने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसे किस वेब-पेज से जारी किया गया है। संबंधित पेज की टाइमलाइन पर जाकर उस पर मौजूद अन्य सामग्री को भी देख लें। हो सके तो पोस्ट को ‘लाइक’ और ‘शेयर’ करने वाले लोगों की सूची पर सरसरी नजर दौड़ाएं। मुमकिन है, इनमें से ज्यादातर यूजर फर्जी हों।
ऐसे जांचें फर्जी लिंक के लाइक
यूजर अपनी ‘फेसबुक हिस्ट्री’ को खंगालकर इस बात का पता लगा सकते हैं कि अतीत में वे भी ‘फेसबुक फार्मिंग’ का शिकार तो नहीं बन चुके हैं। इसके लिए उन्हें अपने फेसबुक पेज पर दाईं ओर ऊपर के हिस्से में दिए ‘एरो’ पर क्लिक करना होगा। फिर मेन्यू में मौजूद ‘एक्टिविटी लॉग’ के विकल्प को चुनने पर खुद की ओर से ‘लाइक’ और ‘शेयर’ की गई सभी सामग्री दिखने लगेगी। अगर आपको कोई ऐसी सामग्री या वेब-पेज नजर आए, जिसे आपने ‘लाइक’ या ‘शेयर’ नहीं किया है तो उस पर जाकर ‘अनलाइक’ या ‘अनशेयर’ करना न भूलें।
फर्जी है ‘बिना इंटरनेट के चलाएं व्हॉट्सएप’ मैसेज
व्हॉट्सएप पर इन दिनों एक मैसेज आग की तरह फैल रहा है। इसमें यूजर से कहा जा रहा है, ‘आपका फोन अल्ट्रा-लाइट वाई-फाई तकनीक के इस्तेमाल में सक्षम है। इसलिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद व्हॉट्सएप के इस्तेमाल के लिए आपको इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी।’ हालांकि यूजर जब संबंधित लिंक को खोलकर उसमें दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं तो एक के बाद एक कई ऐसे वेब-पेज खुलते जाते हैं, जिन्हें अलग-अलग उत्पादों के प्रचार के लिए तैयार किया गया है। इन पेज पर जितने ज्यादा यूजर आते हैं, लिंक भेजने वाले व्यक्ति की उतनी ही अधिक कमाई होती है।

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Author: Hindi Desk

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