क्या आप पेट गैस की समस्या से परेशान है ?? तो करे ये उपाय

constipationआयुर्वेद
गैसांतक वटी। शुरू में दो गोली दिन में तीन बार गर्म पानी से खाने के बाद लें, पर कुछ दिन बाद एक-एक गोली तीन बार कर दें और धीरे-धीरे एक गोली एक बार। हिमालय की लिव-52, दो गोली हर बार खाने के बाद लें। लशुनादि वटी एक-एक गोली दिन में तीन बार लें। एमिल का एमिली क्योर कैप्सूल, सुबह-शाम खाने के बाद लें। चित्रकादि वटी, एक-एक सुबह-शाम लें। अविपत्तिकर चूर्ण, खाना खाने के आधे घंटे बाद दो से छह ग्राम लें। हिंग्वाष्टक, लवणभास्कर चूर्ण या अजमोदादि चूर्ण में से कोई एक लें।
घरेलू औषधियां ।
– एक मुनक्के का बीज निकालकर उसमें मूंग की दाल के एक दाने के बराबर हींग या फिर लहसुन की एक छिली कली रखकर मुनक्के को बंद कर लें। इसे सुबह खाली पेट पानी से निगल लें। इसके 20-25 मिनट बाद तक कुछ न खाएं। तीन दिन लगातार ऐसा करें।
– अजवायन, जीरा, छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। बड़ों के लिए दो से छह ग्राम, खाने के तुरंत बाद पानी से लें। बच्चों के लिए मात्रा कम कर दें।
– पांच ग्राम हल्दी या अजवायन और तीन ग्राम नमक मिलाकर पानी से लें।
– दो लौंग चूस लें या फिर उन्हें उबालकर उस पानी को पी लें।
– पानी में 10-12 ग्राम पुदीने का रस और 10 ग्राम शहद मिलाकर लें।
– खाना खाने के बाद 25 ग्राम गुड़ खाने से गैस नहीं बनती और आंतें मजबूत रहती हैं।
– बिना दूध की नीबू की चाय भी फायदा करती है, पर नीबू की बूंदें चाय बनाने के बाद ही डालें। इसमें चीनी की जगह हल्का-सा काला नमक डाल लें, फायदा होगा।
– बेल का चूर्ण, त्रिफला और कुटकी मिलाकर (दो से छह ग्राम) रात को खाना खाने के बाद पानी से लें।
– लहसुन की एक-दो कलियों के बारीक टुकड़े काटकर थोड़ा-सा काला नमक और नीबू की बूंदें डालकर गर्म पानी से सुबह खाली पेट निगल लें। इससे कॉलेस्ट्रॉल, एंजाइना और आंतों की टीबी आदि बीमारियां ठीक होने में भी मदद मिलेगी। गर्मियों में एक-दो और सर्दियों में दो-तीन कलियां लें।
– गैस बनने पर हींग, जीरा, अजवायन और काला नमक, बहुत कम मात्रा में नौसादर मिलाकर गुनगुने पानी से लें। इनमें से कोई एक चीज भी ले सकते हैं।
– आधे कच्चे, आधे भुने जीरे को कूट कर गर्म पानी से दो ग्राम लें। ऐसा दिन में दो बार एक सप्ताह तक करें। इसके बाद मोटी सौंफ को भून-पीसकर गुड़ के साथ मिक्स करके 6-6 ग्राम के लड्डू बना लें। दिन में दो-तीन बार लड्डू चूसें।
– हर बार खाने के साथ अजवायन भी खाएं तो पाचन बढ़िया होगा। खाने में सादा के साथ-साथ काला नमक भी इस्तेमाल करें।
क्या खाएं
– फ्रूट और सब्जियां ज्यादा-से-ज्यादा खाएं। सब्जियों को ज्यादा तलें नहीं।
– साबुत की बजाय धुली व छिलके वाली दालें खाएं।
– दही व लस्सी का प्रयोग करें।
– नीबू-पानी, नारियल पानी, शिकंजी या बेल का शर्बत पीना अच्छा है।
– ठंडा दूध ले सकते हैं।
– बादाम व किशमिश लें, पर काजू कम मात्रा में लें।
– सौंफ, हींग, अदरक, अजवायन व पुदीने का प्रयोग करना अच्छा है।
-मोटा चावल खाएं। यह कम गैस बनाता है, जबकि पॉलिश वाला चावल ज्यादा गैस बनाता है। पुलाव के बजाय चावल उबालकर खाएं।
– खाना सरसों के तेल में पकाएं। देसी घी भी ठीक है, लेकिन मात्रा सीमित रखें। वनस्पति घी और रिफाइंड से बचें।
इनसे बचें
– तेल-मक्खन व क्रीम आदि ज्यादा न लें।
– मैदे और रिफाइंड आटे से बनी चीजें और बेकरी प्रॉडक्ट जैसे कुलचे, पूरी, ब्रेड पकौड़ा, छोले-भटूरे, परांठे, बंस, बिस्कुट, पैटीज, बर्गर व फैन आदि कम खाएं।
– नमकीन, भुजिया, मट्ठी कम खाएं।
-चना, राजमा, उड़द व मटर आदि का प्रयोग कम करें। इन्हें बनाने से पहले भिगो लें। जिस पानी में भिगोएं, उसको इस्तेमाल करके के बजाय फेंक दें।
– चाय-कॉफी ज्यादा न पीएं। खाली चाय पीने से भी गैस बनती है।
– गर्म दूध भी गैस बनाता है। अल्सर वाले ठंडा दूध लें।
– सॉफ्ट-ड्रिंक्स या कोल्ड-ड्रिंक्स न पीएं।
– मोटी इलायची, तेजपत्ता, लौंग, जावित्री, जायफल आदि साबुत मसाले तेज गंध होने से पेट को नुकसान पहुंचाकर गैस की वजह बनते हैं। इन्हें पीसकर और कम मात्रा में लें।
– राजमा, छोले, उड़द, लोबिया या साबुत दालों से गैस बन सकती है।
– अरबी-भिंडी और राजमा से परहेज रखें।
– कच्चा लहसुन, कच्चा प्याज व अदरक भी गैस बनाता है।
– मूली-खीरे आदि से गैस की शिकायत हो तो उनका परहेज करें।
– अगर खाने का ज्यादातर हिस्सा फैट या कार्बोहाइड्रेट से आता है यानी रोटी, आटा व बेसन आदि ज्यादा खाते हैं तो गैस ज्यादा बनेगी।
– संतरा व मौसमी आदि एसिडिक फलों के रस से गैस बनती है। जूस के बजाय ताजे फल खाएं।
– खाली पेट दूध पीने और खाली पेट फल खासकर सेब और पपीता खाने से गैस बनती है।
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Author: Hindi Desk

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