इस साल के पहेले सूर्यग्रहण के बुरे असर से बचने के लिए करे ये उपाय

images11  इस साल का पहला यानी फाल्गुन अमावस्या (9 मार्च) पर लगने वाला वर्ष का पहला खग्रास सूर्यग्रहण पूर्वोत्‍तर राज्‍यों सहित मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, उज्जैन सहित देश के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक मंगलवार शाम 5.45 बजे लगेगा। इसके चलते कई मंदिरों में शाम को दर्शन-पूजन और आरती नहीं होगी। ज्योतिर्विदों के अनुसार ग्रहण का स्पर्श बुधवार सुबह 5.45 बजे, मध्यकाल 7.27 और मोक्ष 9.08 बजे होगा। सूर्योदय सुबह 6.42 बजे होगा और                                                                                                  सुबह 6.47 बजे तक खग्रास स्वरूप में दिखाई देगा।

शास्त्र के जानकारों के अनुसार, कुंभ राशि में पंचग्रही योग में ग्रहण आया है। इस साल पड़ने वाले ग्रहण के बारे में पंडितो का कहना है की ऐसा योग 320 साल बाद बना है। इस योग में इतने सालो बाद कुंभ राशि पर एक दो नहीं बल्कि पुरे पंचग्रही के अनोखे योग में सूर्य ग्रहण होगा। चलिए आपको बतातें है आखिर कौनसे वह देश के कोने है जहां आपको इस ग्रहण देखने मिलेगा। देश के बड़े-बड़े पंडितों की माने तो कुंभ राशि में केतु, बुध, सूर्य, शुक्र और चंद्र रहेंगे। सूर्यग्रहण के कारण 12 घंटे पहले लगने वाले सूतक के कारण आज शाम 6 बजे से मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इसके बाद अगले दिन सूर्यग्रहण खत्‍म होने के बाद खोले जाएंगे।

सूर्य ग्रहण 9 मार्च को सुबह 4:50 से 10:05 बजे तक

हालांकि यह ग्रहण भारत में कुछ देर के लिए ही दिखाई देगा। भारत में बुधवार सुबह 5.43 बजे ग्रहण लगेगा, जो उत्तर पश्चिम एवं पश्चिम भाग को छोड़कर शेष भारत में सुबह 6.47 बजे तक रहेगा। ग्रहण कुंभ राशि में होगा, अन्य राशियों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। इस ग्रहण की अवधि करीब डेढ़ घंटे की होगी। मंदिरों के पट ग्रहण की अवधि में बंद रहेंगे। सुबह ग्रहण की समाप्ति के बाद भगवान का स्नान-अभिषेक कर पूजापाठ का कार्यक्रम होगा।

गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान सूर्यग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की छाया आदि से विशेष रूप से बचना चाहिए, क्योंकि ग्रहण की छाया का कुप्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ने का डर रहता है। ग्रहण से पहले अगर गर्भवती महिला अपनी साड़ी के पल्लू को गेरू के रंग से रंग ले, तो बच्चे पर कुप्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार गेरू में भी बहुत सारे औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रहण के समय देवपूजा को भी निषिद्ध बताया गया है। इसी कारण अनेक मंदिरों के कपाट ग्रहण के समय बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण के बाद नदियों में स्नान कर लेने से ग्रहण के सभी कुप्रभाव समाप्त हो जाते हैं।

9 मार्च 2016 को सूर्यग्रहण कुंभ राशि एवं पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में होगा। हर राशि पर इसका अलग प्रभाव होगा। किसी के लिए यह ग्रहण शुभ साबित होगा तो किसी राशि के जातकों के लिए यह अशुभ भी हो सकता है। उन्हें इस दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए।

Hindi Desk
Author: Hindi Desk

Posted Under Uncategorized