अमंगल आचरण / काका हाथरसी मात शारदे नतमस्तक हो, काका कवि करता यह प्रेयर ऐसी भीषण चले चकल्लस, भागें श्रोता टूटें चेयर वाक् युद्ध के साथ-साथ हो, गुत्थमगुत्था हातापाई फूट जायें दो चार खोपड़ी, […]

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