महिला नागा साधुओं से जुड़े कुछ अदभूत तथ्य…..

mahila naga sadhuभारत देश में साधु-संत बनने की परंपरा आदि काल से चली आ रही है। हमारे देश में हर प्रकार के साधु मिलते हैं जो परमात्मा की प्राप्ति में अपने घर से निकल कर सन्यास ले लेते हैं। नागा साधु भी इन्ही में से एक प्रकार है। नागा साधु बनने की विधि बहुत कठिन होती है, जिसे कोई आम आदमी नहीं कर सकता है। हमें पुरषों के बारे में तो पता है कि वह किस तरह सन्यास लेकर नागा साधु बनते हैं और किन-किन अखाड़ो में रहते हैं, पर हम महिला नागा साधुओं के बारे में उतना नहीं जानते हैँ। इसी को ध्यान में रखकर हमने यह लेख लिखा है जिसमें महिला नागा साधुओं के बारे में आपको बताया जायेगा।। —

1. सन्यासिन बनने से पहले महिला को 6 से 12 साल तक कठिन बृह्मचर्य का पालन करना होता है। इसके बाद गुरु यदि इस बात से संतुष्ट हो जाते है कि महिला बृह्मचर्य का पालन कर सकती है तो उसे दीक्षा देते है।

2 – प्रयाग महाकुंभ में शुरू हुई परंपरा इलाहाबाद(प्रयाग) में संपन्न हुए 2013 महाकुंभ के दौरान महिला नागा सन्यासियों के स्नान और अखाड़े बनाने के लिए अलग से जगह दी गई थी। उस दौरान इसका विरोध भी हुआ था। महाकुंभ में ही पहली बार पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े ने साध्वी वेदगिरी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी।

3. महिला नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के साधु-संत महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की जांच-पड़ताल करते है।

4. महिला को भी नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।

5. नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला संन्यासियों को एक अलग पहचान और खास महत्व दिया जाता है। ये महिला साधु पुरुष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए अपने तन पर एक गेरूआ वस्त्र लपेटे रहती हैं। बिना वस्त्रों के शाही स्नान में नहाना प्रतिबंधित होता है, इसलिए यह गेरूआ वस्त्र धारण कर ही स्नान करती हैं।

6. जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है, उसके आचार्य महामंडलेष्वर ही उसे दीक्षा देते है।

7. महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले उसका मुंडन किया जाता है और नदी में स्नान करवाते है।

8. सिंहस्थ और कुम्भ में नागा साधुओं के साथ ही महिला सन्यासिन भी शाही स्नान करती है। अखाड़े में सन्यासिन को भी पूरा सम्मान दिया जाता है।

9. यह सन्यासिनें पूरा दिन भगवान का जप करती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है। इसके बाद नित्य कर्मो के बाद शिवजी का जप करती है दोपहर में भोजन करती है और फिर से शिवजी का जप करती है। शाम को दत्तात्रेय भगवान की पूजा करती है और इसके बाद शयन।

10. जब महिला नागा सन्यासिन बन जाती है तो अखाड़े के सभी साधु-संत इन्हे माता कहकर सम्बोधित करते है।

11. इन महिला संन्यासियों की अलग दुनिया है इन महिला नागा सन्यासियों के शिविर में कोई भी आम व्यक्ति बिना इन की इजाजत के प्रवेश नहीं कर सकत है। इन सन्यासियों को ईष्टदेव भगवान दत्तात्रेय की मां अनुसुइया हैं और उन्हीं को ईष्ट मानकर यह आराधना करती हैं।

12. महिला नागा सन्यासिन माथे पर तिलक और सिर्फ एक चोला धारण करती है। आमतौर पर ये चोला भगवा रंग का या सफेद होता है।

13. सन्यासिन बनने से पहले महिला को ये साबित करना होता है कि उसका परिवार और समाज से कोई मोह नहीं है। वह सिर्फ भगवान की भक्ति करना चाहती है। इस बात की संतुष्टि होने के बाद ही दीक्षा देते है।

14 . पुरुष नागा साधू और महिला नागा साधू में फर्क केवल इतना ही है की महिला नागा साधू को एक पिला वस्त्र लपेट केर रखना पड़ता है और यही वस्त्र पहन कर  स्नान करना पड़ता है।  नग्न स्नान की अनुमति नहीं है, यहाँ तक की कुम्भ मेले में भी नहीं।

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Author: Hindi Desk

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