जहां चाह है वहां राह है – महज़ 27 वर्ष की उम्र में 5-5 बड़ी सरकारी नौकरियों में हुआ चयन

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पीपलू- सरकारी नौकरी के लिए कड़ी स्पर्धा के बीच किसी का एक बार भी फाइनल चयन हो जाना बड़ी बात समझी जाती है। जहां एक और सरकारी नौकरी पाना रेगिस्तान में पानी निकालने के बराबर है वही इस नौजवान ने जो कर दिखाया है वह नौकरी के लिए प्रयासरत अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का विषय है पीपलू उपखंड क्षेत्र के चौगाई ग्राम पंचायत के ब्रांच पोस्टमास्टर घनश्याम पारीक के पुत्र श्यामसुंदर पारीक ने 27 वर्ष की उम्र में पांच बार सरकारी नौकरी में चयनित होकर क्षेत्र में मेहनत करने पर सफलता अवश्य मिलने की मिसाल कायम की हैं।

पीपलू उपखंड क्षेत्र के चौगाई ग्राम पंचायत के ब्रांच पोस्टमास्टर घनश्याम पारीक के पुत्र श्यामसुंदर पारीक ने 27 वर्ष की उम्र में पांच बार सरकारी नौकरी में चयनित होकर क्षेत्र में मेहनत करने पर सफलता अवश्य मिलने की मिसाल कायम की हैं। श्यामसुंदर पारीक केवल राजस्थान के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल बन कर उभरे हैं।

चौगाई के श्यामसुंदर पारीक ने 18 जून शुक्रवार शाम को राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संस्कृत शिक्षा विभाग की 58 पदों की प्राध्यापक सामान्य व्याकरण विद्यालय प्रतियोगी परीक्षा 2018 के परिणाम में ऑल राजस्थान में पांचवी रैंक प्राप्त की हैं।

वहीं 9 जून 2021 को राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संस्कृत शिक्षा विभाग की 52 पदों की प्राध्यापक व्याकरण भर्ती परीक्षा 2018 के आए परिणाम में आल राजस्थान में द्वितीय रैंक प्राप्त की हैं। श्यामसुंदर का इससे पहले तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2018 में 61 वीं रैंक, वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा 2016 में 58 वीं रैंक, स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2018 माध्यमिक शिक्षा विभाग में 23 वीं रैंक के साथ चयन हुआ।

श्यामसुंदर ने सभी नौकरियों को ज्वाइन किया हैं। वहीं हाल में ही जिस परीक्षा में चयनित हुए हैं उसको भी ज्वाइन करेंगे। श्यामसुंदर पारीक वर्तमान में भीलवाड़ा जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांखड़ा कोटड़ी में व्याख्याता पद पर कार्यरत हैं। श्यामसुंदर की सफलता के बाद में खुशी का माहौल हैं तथा ग्रामीणों द्वारा स्वागत, सम्मान करते हुए बधाई भी दी गई हैं।

बिना कोचिंग के ही इतना ज्ञान हासिल कर लिया है कि सरकारी नौकरियों की लगी है लाइन

जहां आम तौर पर देखा जा रहा है कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और नौकरी के लिए लोग कोचिंग करवाते हैं। जिसमें लाखों रुपए पानी की तरह बहाया जाता है। तो वहीं अच्छी सरकारी नौकरी के लिए गरीब व मध्यम परिवार से आने वाले बच्चों के अविभावक किसी तरह से अपनी बाकी खर्चों में कटौती करके अथवा बैंकों से शिक्षा रूर लेके कोचिंग कराई जाती है लेकिन श्यामसुंदर ने अपनी मेहनत व लगन से बिना कोचिंग किए ही इतना सब कुछ हासिल कर लिया। श्याम सुंदर विद्यार्थियों व सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

श्यामसुंदर ने रीट परीक्षा 2015 में 80 प्रतिशत अंक, 2016 से 2020 तक लगातार यूजीसी नेट पास, यूजीसी नेट में भी आल इंडिया टॉप 99.95 प्रतिशत स्कोर से जेआरएफ अवॉर्ड प्राप्त कर लोहा मनवाया हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने आज तक कोई कोचिंग नहीं की। उसने अपने स्तर पर तैयारी करते हुए सफलता हासिल की है। श्यामसुंदर ने बताया कि वह सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं हैं।

हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

एडिटर: हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

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