मकर संक्रांति से पहले ही बाजारों में पतंग-डोर खरीदने के लिए उमड़ रही है लोगों की भीड़ ,सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही है धज्जियां

मकर संक्रांति से पहले ही बाजारों में पतंग-डोर खरीदने के लिए उमड़ रही है लोगों की भीड़ ,सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही है धज्जियां

कोरोना और महंगाई के बीच भी इस साल पतंगबाजों का उत्साह कम नहीं हुआ है। मकर संक्राति आने में अभी चार दिन ही शेष हैं। ऐसे में लोगो ने बाजार में पतंग और मांझा खरीदने के लिए लोगों की काफी भीड़ दिखाई दे रही है । दोपहर से लेकर शाम तक बाजार में पांव रखने की भी जगह नहीं थी।पतंग और मांझा खरीदने बाले लोगो के बीच कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं है ,और न ही ज्यादातर लोग मास्क लगाए नजर आये।

पतंग और मांझे के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि रविवार को एक ही दिन में लगभग 8 से 10 करोड़ का कारोबार हुआ। पतंग व्यवसायियों को इस बार सूरत सहित दक्षिण गुजरात में 40 करोड़ का कारोबार होने की उम्मीद है । कोरोना की तीसरी लहर के भय के बावजूद रविवार को पतंग बाजार में लोगों की भारी भीड़ रही। स्कूल बंद होने के कारण और मकर संक्राति के पहले ही लोगों ने खरीदी कर ली । शहर का मुख्य पतंग बाजार माने जाने वाले डबगरवाड और रांदेर में पतंग की दुकानों, डोरी घिसने की दुकान, कच्चे धागे की दुकान पर सुबह से लेकर शाम तक भीड़ जमी रही। मांझा डोरी घिसने वालों की दुकानों पर तो इतनी भीड़ थी कि उन्हें दो दिन बाद डोरी घिसकर देने का वादा करना पड़ा। पतंग, धागों के अलावा फेविस्टिक, टेप की पट्टी, गोंद, सीटी और मास्क आदि की भी बड़े पैमाने पर खरीद की गई । सामान्य तौर पर सूरत सहित पुरे गुजरात में मकर संक्राति के 15 दिन पहले से पतंग- मांझा आदि की खरीदी होने लगती है । इस बार कोरोना के कारण शुरुआती दिनों में व्यापार सुस्त रहा, लेकिन बीते दो दिनों से कारोबार अच्छा चल रहा है। पतंग विक्रेता ने बताया कि हमें डर था कि इस बार कोरोना के कारण शायद पूरा स्टाॅक नहीं बिकेगा। लेकिन आज रबिबार को जिस तरह से व्यापार हुआ है इसे देखकर पूरा स्टॉक बिक जाने की उम्मीद है । सूरत के लोग 14 जनवरी यानी मकर संक्राति के दिन तक खरीदी करते हैं । इस बार बांस कागज और अन्य चीजों की कीमत के साथ मजदूरी बढ़ने के कारण पतंगों की कीमत में 30 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।

क्या है मकर संक्रांति पर दान देने की परंपरा-

मकर संक्रांति पर पुरोहितों को दान देने की पुरानी परंपरा है। सुबह लोग स्नान के बाद खिचड़ी व तिल का दान करते हैं। उसके बाद परिवार के साथ खिचड़ी का आनंद लेते हैं। मकर संक्रांति को सुख सम्बृद्धि का दिन भी माना जाता है।

चोरी छिपे हो रही चाइनीज मंझे की बिक्री

बाजारों में चाइनीज मंझे की भले ही बिक्री पर रोक हो, लेकिन थोक बाजारों से लेकर फुटकर दुकानों में भी चोरी छिपे बिक्री खूब हुई। दुकानों में तो धागे का मंझा सजाया गया, लेकिन ग्राहकों की मांग पर तत्काल चाइनीज मंझा उपलब्ध करा दिया जाता है।

बढ़ सकते है कोरोना के मामले

बाजारों में बढ़ती भीड़ के मद्देनजर आशंका जताई जा रही है इस तरह से पतंग-डोर खरीदने के लिए उमड़ रही बाजारों मे लोगों की भीड़ ,सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही है धज्जियां को देख कर ऐसा लग रहा है की मानो कोई कोरोना संक्रमण है ही नहीं।

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अनुराग बघेल

एडिटर: अनुराग बघेल

मेरा नाम अनुराग बघेल है। मैं बिगत कई सालों से प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ा हूँ। पत्रकारिकता मेरा पैशन रहा है। फिलहाल मैं हिन्दुस्तान 18 हिन्दी में रिपोर्टर ओर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं।

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