शर्मनाक- एक ही परिवार में 8 लोगों की कोरोना से मौत, कोई नेता अधिकारी हाल लेने नहीं पहुंचा

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में जितने आंकड़े सरकार बता रही है उससे कई गुना मौतें कोरोना से हो चुकी है। आलम यह है कि कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट से लेकर मौतों का आंकड़ा छुपाने के लिए सरकारी मशीनरी लगी हुई है। संवेदनहीनता इतनी गिर गई है कि वर्तमान सरकार जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख बनाने में लगी है। उसे यह भी नहीं पता कि जिनके घर उजड़ गए, उनके घर पर लोग किस तरह से जी रहे होंगे। लोग किस तरह से रह रहे होंगे, उनका हाल लेने न कोई नेता पहुंचा, न कोई विधायक पहुंचा, न कोई सांसद पहुंचा। राजधानी लखनऊ के एक परिवार से कोरोना रूपी काल ने चंद दिनों के भीतर सारी खुशियां छीन लीं। कोरोना संक्रमण की चपेट में आए इस परिवार ने चंद दिनों में 8 लोगों को खो दिया। सोमवार को जब 5 लोगों का एकसाथ तेरहवीं संस्कार किया गया तो पूरा गांव गमगीन था।

8 people died in a family due to corona in lucknow,

कोरोना की दूसरी लहर इतनी घातक है कि किसी बुजुर्ग से बुढ़ापे का सहारा छीन लिया, किसी बेटे को अनाथ कर दिया, किसी का सुहाग मिटा दिया, किसी से हाथ में राखी बांधने वाली बहन तो किसी से रक्षा करने वाला उसका भाई छीन लिया। ऐसा ही एक परिवार राजधानी लखनऊ से सटे इमलिया पूर्वा गांव में है जिसने कोरोना काल में अपना सबकुछ लुटा दिया। कुछ दिनों के भीतर ही कोरोना की चपेट में आने से घर के 4 बेटों, 2 बहनों, मां और बड़ी मां ने दम तोड़ दिया।

गांव में रहने वाले ओमकार यादव के परिवार पर ऐसी विपदा आई कि कुछ रोज में सारी खुशियां उजड़ गईं। जहां कुछ महीनों पहले हंसते खेलते इस परिवार में सब एक साथ मिलकर खुशियां मनाते थे वहां चंद दिनों के भीतर 8 लोगों की मौत ने परिवार से जिंदगी भर की खुशियां छीन लीं। एक ही घर में 4-4 विधवाएं हो गईं, अब उन्हें कौन सहारा देगा ये सोच-सोचकर ओमकार यादव रोने लगते हैं।

एक दूसरे से छिपाते रहे कोरोना से हो रही मौतें

ओमकार यादव का कहना है कि पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया था। एक साथ सबका इलाज हो रहा था, लेकिन जब मौतों का सिलसिला शुरू हुआ तो ऐसे हालात आ गए कि भाई को भाई की मौत, बेटे को मां की मौत की खबर भी नहीं दी गई। ओमकार ने बताया कि उनके 4 भाइयों, मां और 2 बहनों की मौत कोरोना से हुई है जबकि बड़ी मां अपने सामने हुई बेटों की मौत बर्दाश्त नहीं कर सकीं, उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

25 दिन में हुईं 8 मौतें, मां बेटे ने एक ही दिन तोड़ा दम
ओमकार यादव के मुताबिक सभी मौतें 25 दिन के भीतर हुईं हैं। उनका कहना है कि उनकी मां और एक भाई की एक ही दिन अर्थी उठी थी। जिनकी मौत हुई हैं उनमें 56 वर्षीय मिथलेश कुमारी, 50 वर्षीय निरंकार सिंह यादव, 82 वर्षीय कमला देवी, 52 वर्षीय शैल कुमारी, 60 वर्षीय विनोद कुमार, 62 वर्षीय विजय कुमार, 85 वर्षीय रूपरानी और 35 वर्षीय सत्यप्रकाश हैं।

परिजन ने कहा: प्रशासन जागता तो बच सकती थी कुछ लोगों की जान

4 भाइयों की मौत से आहत ओमकार यादव ने बताया कि जिस वक्त कोरोना से उनका पूरा परिवार संक्रमित हुआ था उस वक्त प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं की गई। उनका कहना है कि 8 मौतों के बाद भी प्रशासन और सरकार की तरफ से कोई झांकने तक नहीं आया। गांव वालों का कहना है कि प्रशासन ने गांव में फैले संक्रमण के बावजूद सैनिटाइजेशन तक नहीं करवाया।

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Rajiva Mani Tripathi

एडिटर: Rajiva Mani Tripathi

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