भगवान श्री राम के बाल रूप का वर्णन करती, स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती जी की रचना

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भगवान श्री रामचंद्र जी के बाल रूप का वर्णन करते हुए स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती जी की यह पद्य रचना भजन..

कारे कारे केश कैद करत रसिक चित्त,
भौंह करे काम जनु काम की कमान को…

नयन सरोज लखि लाजै द्रग खंजन के,
नासिका करत नास कीर के गुमान को..

भनत “राजेश” दंत पन्गती दमक दूर्,
करे अभिमान चपला की चमकान को…

घायल भई हौ काल राम रघुवीर जू ने,
मारयो उर वीर तीर तीरछी तकान को….


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हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

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