भगवान श्री रामचंद्र जी के बाल रूप का वर्णन करते हुए स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती जी की यह पद्य रचना भजन.. कारे कारे केश कैद करत रसिक चित्त, भौंह करे काम जनु काम की कमान […]

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