रानी सती मंदिर की कथा और घूमने की पूरी जानकारी – The story of Rani Sati Temple and the full details of the roaming

रानी सती मंदिर की कथा और घूमने की पूरी जानकारी – The story of Rani Sati Temple and the full details of the roaming

राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित बहुत ही प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल रानी सती मंदिर , जहाँ प्रति दिन बड़ी संख्या में लोग सती देवी के दर्शन के लिए आते है। रानी सती मंदिर भारत के उन गिने चुने मंदिर में से एक है जो किसी देवी देवता की जगह किसी व्यक्ति विशेष को समर्पित है । यह मंदिर झुंझुनू की पहाड़ियों पर स्थित है जो मंदिर के आकर्षण में चार चाँद लगाने का कार्य करते है । हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार रानी सती ने अपने पति की मृत्यु के बाद आत्मदाह कर लिया था । तब से ही रानी सती राजस्थान के इतिहास में दादी जी के नाम से प्रसिद्ध है ।

यदि आप रानी सती मंदिर झुंझुनू घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं या फिर इस अनोखे मंदिर के बारे में और अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं तो आपको इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ना चाहिये जिसमे आप रानी सती मंदिर का इतिहास, रानी सती की कथा, सहित यहाँ घूमने जाने की पूरी जानकारी के बारे में जान सकेगें –

रानी सती मंदिर की वास्तुकला –

झुंझुनू वाली रानी सती का मंदिर झुंझुनू की पहाड़ियों पर स्थित एक भव्य मंदिर है जो अपनी वास्तुकला के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के अंदर आंतरिक भाग को उत्कृष्ट भित्ति चित्रों और कांच के मोज़ाइक से सजाया गया है जो जगह के पूरे इतिहास को दर्शाता है। बता दे रानी सती मंदिर परिसर में हनुमान मंदिर, सीता मंदिर, ठाकुर जी मंदिर भगवान गणेश मंदिर और शिव मंदिर भी हैं । साथ ही मुख्य मंदिर में बारह छोटे सती मंदिर भी हैं। भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा परिसर के बीचो बीच हरे-भरे बगीचों में स्थित है।

 कथा – पौराणिक कथाओं और किवदंतीयों के अनुसार रानी सती की कथा महाभारत के काल से जुडी हुई है। जो अभिमन्यु और उनकी पत्नी उत्तरा से जुड़ी हुई है। महाभारत के भीषण युद्ध में कोरवो द्वारा रचित चक्रव्यूह को तोड़ते हुए जब अभिमन्यु की मृत्यु हुई, तो उत्तरा कौरवों द्वारा विश्वासघात में अभिमन्यु को अपनी जान गंवाते देख उत्तरा शोक में डूब गई और अभिमन्यु के सतह सती होने का निर्णय ले लिया। लेकिन उत्तरा गर्भ से थी और एक बच्चो को जन्म देने वाली थी। यह देखकर श्री कृष्ण ने उत्तरा से कहा कि वह अपना जीवन समाप्त करने के विचार को भूल जाए, क्योंकि यह उस महिला के धर्म के खिलाफ है जो अभी एक बच्चे को जन्म देने वाली है। श्री कृष्ण की यह बात सुनकर उत्तरा बहुत प्रभावित हुई और उन्होंने सती होने के अपने निर्णय को बदल लिया लेकिन उसके बदले उन्होंने ने एक इच्छा जाहिर जिसके अनुसार वह अगले जन्म में अभिमन्यु की पत्नी बनकर सती होना चाहती थी ।

उसके बाद उत्तरा अगले जन्म में राजस्थान के डोकवा गाँव में गुरसमल बिरमेवाल की बेटी के रूप में पैदा हुई थी जिनका नाम नारायणी रखा गया था। जबकि अभिमन्यु का जन्म हिसार में जलीराम जालान के पुत्र के रूप में हुआ था और उनका नाम तंदन जालान रखा गया था । टंडन और नारायणी ने शादी कर ली और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे थे। उनके पास एक सुंदर घोड़ा था जिस पर हिसार के राजा के पुत्र की नजर थी जो उसे किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता था लेकिन तंदन ने अपना कीमती घोड़ा राजा के बेटे को सौंपने से इनकार कर दिया। राजा का बेटा तब घोड़े को जबरदस्ती हासिल करने का फैसला करता है और इस तरह टंडन को द्वंद्वयुद्ध के लिए चुनौती देता है। टंडन बहादुरी से लड़ाई लड़ता है और राजा के बेटे को मार डालता है । तभी राजा क्रोधित हो उठता है और टंडन को धोके से मार देता है। टंडन की वीरगति प्राप्ति को देखकर नारायणी कुछ समय के लिए तो शोक में डूब जाती है लेकिन कुछ समय बाद वीरता और पराक्रम से लड़कर राजा को मार गिराती है और अपने पति की हत्या का प्रतिशोध पूरा कर लेती है। उसके बाद अपने पति के साथ सती होने की इच्छा को सामने रखते हुए तंदन के साथ सती हो गई ।

कब लगता है रानी सती मंदिर मेला

झुंझुनू के प्रसिद्ध रानी सती मंदिर में हर साल मेले का आयोजन भी किया जाता है जो पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह मेला प्रति बर्ष भादो मास की अमावस्या दिन लगता है जिसमे भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते है। मेले के दौरान भक्तों द्वारा नारायणी देवी को चुनरी चढ़ाई जाती है उनका श्रृंगार किया जाता है, साथ ही मंदिर प्रबंधन द्वारा भंडारे भी चलाया जाता है। इस दिन मंदिर में देवी सती की विशेष पूजा भी की जाती है जिसमें भक्तगण अपने परिवार के साथ पहुंचते हैं पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

झुंझुनू वाली रानी सती का मंदिर खुलने का समय –

रानी सती मंदिर प्रतिदिन सुबह 5.00 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक और दोपहर 3.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक खुलता है। श्रद्धालु इस दौरान कभी दादी माँ या रानी सती के दर्शन के लिए यहाँ आ सकते है।

रानी सती मंदिर का प्रवेश शुल्क –

सती मंदिर में प्रवेश और दर्शन के लिए कोई भी शुल्क नही है । यहाँ श्रद्धालु बिना किसी शुल्क के घूम सकते है।

रानी सती मंदिर के आसपास झुंझुनू में घूमने की जगहें –

यदि आप अपने फ्रेंड्स या फैमली के साथ रानी सती मंदिर झुंझुनू घूमने जाने का प्लान बना रहें हैं तो हम बता दे झुंझुनू में घूमने के लिए रानी सती मंदिर के साथ साथ खेतड़ी पैलेस,लोहार्गल,मोदी और तिबरवाल हवेली भी अन्य कई प्रसिद्ध पर्यटक स्थल मौजूद है जिन्हें आप रानी सती मंदिर की यात्रा के दौरान भी घूमने जा सकते है । वैसे तो आप कभी भी जा सकते है लेकिन यदि हम रानी सती मंदिर झुंझुनू घूमने जाने के लिए सबसे अच्छे समय की बात करें तो वह बारिश के बाद सर्दियों के समय माना जाता है।

रानी सती मंदिर झुंझुनू कैसे पहुचें

1 फ्लाइट से -यदि आप फ्लाइट से ट्रेवल करके झुंझुनू घूमने जाने कि सोच रहें हैं तो हम आपको बता दे झुंझुनू के लिए कोई सीधी फ्लाइट कनेक्टविटी नही है। इसके लिए आपको जयपुर हवाई अड्डे के लिए फ्लाइट लेनी होगी। जयपुर एयरपोर्ट झुंझुनू का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो झुंझुनू से लगभग 185 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

२-ट्रेन से-सती मंदिर घूमने जाने के लिए ट्रेन से हमें झुंझुनू के रेलवे स्टेशन के लिए टिकट लेना होगा। उसके बाद झुंझुनू के रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर स्टेशन के बाहर से ऑटो, टेक्सी लेकर आसानी से लगभग 20 मिनिट में रानी सती मंदिर जा सकते है।

3 सड़क मार्ग से – सड़क मार्ग से भी रानी सती मंदिर झुंझुनू की यात्रा करना काफी आसान और सुविधाजनक हैं क्योंकि झुंझुनू रोड नेटवर्क द्वारा राजस्थान के सभी शहरों से जुड़ा है साथ ही झुंझुनू के लिए आसपास के सबसे प्रमुख शहरों से बसें से भी चलती है जिनसे पर्यटक आसानी से झुंझुनू आ सकते है। इनके अलावा आप अपनी पर्सनल कार या एक टेक्सी बुक करके भी यहाँ घूमने आ सकते है।

 

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अनुराग बघेल

एडिटर: अनुराग बघेल

मेरा नाम अनुराग बघेल है। मैं बिगत कई सालों से प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ा हूँ। पत्रकारिकता मेरा पैशन रहा है। फिलहाल मैं हिन्दुस्तान 18 हिन्दी में रिपोर्टर ओर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं।

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