छोटे शहरों से निकले ये 5 खिलाड़ी जिन्होंने 2021 में बनाई अपनी विशेष पहचान

छोटे शहरों से निकले ये 5 खिलाड़ी जिन्होंने 2021 में बनाई अपनी विशेष पहचान

साल 2021 में एक तरफ कोरोना की दूसरी लहर से लोग परेशान थे तो दूसरी तरफ इसमें भी जिंदगी को आगे ले जाने के लिए हमारे स्पोर्ट्समैन अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे है । पिछले साल २०२१ मे भी कुछ ऐसे माटी के लाल सामने आए, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से एक अलग मुकाम हासिल की. कुछ ने भविष्य की उम्मीदें भी जगाईं तो कुछ ने रिकॉर्ड कायम किया ।

1 शारदानंद तिवारी

हॉकी खिलाड़ी शारदानंद तिवारी के होमगार्ड पिता ने जिस तरह से अपने बेटे को एक अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बनाया, वो समाज के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। पैसे की दिक्कत के बावजूद उनके पिता ने हॉकी खेलने की अनुमति दी, जिसके बाद उन्होंने खुद को तराशना शुरू किया और बर्ष 2016 में साई सेंटर लखनऊ का हिस्सा बनने में सफल रहे. आगे अपने शानदार खेल की बदौलत वो जूनियर नेशनल के लिए यूपी की टीम में जगह बनाने में सफल हुए. इसके अलावा उन्हें सीनियर नेशनल में भी यूपी टीम में चुना गया. 2020 में शारदानंद खेलो इंडिया में उत्तर प्रदेश के लिए गोल्ड जीतने में सफल रहे. अब वो खुद को ओलंपिक के लिए तैयार कर रहे हैं ।

2 अरुणा तंवर

अरुणा तंवर के पिता ड्राइवर हैं. वह पैरालिंपिक्स में क्वालीफाई करने वाली भारत की पहली ताइक्वांडो खिलाड़ी बन गई हैं. दिव्यांग होते हुए भी जिस तरह से हौसलों की उड़ान भरी वो समाज के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। हरियाणा में भिवानी के दीनोद गांव की रहने वाली अरुणा एक आम परिवार से आती हैं. उनके पिता पेशे से एक ड्राइवर थे और कैमिकल फैक्ट्री में काम करते थे। उन्होंने आर्थिक तंगी झेलते हुए अपनी बेटी को बड़ा किया. बचपन से ही वो मार्शल आर्ट की बहुत बड़ी प्रशंसक रही हैं. शुरुआत में वो सामान्य वर्ग में खेल कर आगे बढ़ना चाहती थी। मगर, वहां मन के मुताबिक सफलता न मिलने के कारण उन्होंने पैरा-ताइक्वांडो में भाग लेना शुरू कर दिया. लेकिन यह सब भी
उनके लिए आसान नहीं था, मगर उन्होंने हार नहीं मानी. परिणाम स्वरूप अरुणा तंवर को आगे सफलता मिलती चली गई. इसी क्रम में अब आगामी टोक्यो पैरालम्पिक के लिए क्वालीफाई कर उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ भारत का नाम भी रौशन कर दिया है।

3. सतीश कुमार

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय बॉक्सर सतीश कुमार सुपर हैवीवेट का क्‍वार्टर फाइनल मुकाबला हार गए. मगर उन्‍होंने आंख की गंभीर चोट के बाद जिस तरह से सात टांकों के साथ दुनिया के नंबर एक मुक्‍केबाज उज्‍बेकिस्‍तान के बाखोदिर जालोलोव का क्‍वार्टर फाइनल में डटकर सामना किया। क्‍वार्टर फाइनल से पहले ही उनकी आंख में गंभीर चोट आई थी. उन्‍हें सात टांके लगे थे. उनके खेलने पर संशय था, मगर वो रिंग में उतरे और विपक्षी खिलाड़ी का मज़बूती से सामना किया. लड़ाई के दौरान सतीश के माथे पर लगा घाव खुल गया था. बावजूद इसके वो लड़ते रहे।

4. युधवीर चरक

आईपीएल २०२१ मे कई युवा खिलाड़ी शामिल हुए। जिनके लिए यह टूर्नामेंट किसी सपने से कम नहीं है. उनमें से एक नाम मुंबई इंडियन के तेज गेंदबाज युधवीर चरक का है। मुंबई इंडियन के तेज गेंदबाज युधवीर चरक IPL ऑक्सन में अपना नाम सुनते ही रो पड़े थे। जम्मू कश्मीर से निकल इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था.। युधवीर सिंह चरक का जन्म 13 सितंबर 1997 को जम्मू के रूप नगर में मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. उनको बचपन से क्रिकेट खेलने का जुनून सवार हो गया. पिता धर्मवीर सिंह चरक बेटे को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे । उनके पिता नहीं चाहते थे कि वो क्रिकेटर बने, पांचों बहनों ने सपोर्ट किया, तब जाकर वो आगे बढ़ सके थे.पिता धर्मवीर सिंह चरक बेटे को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे। लेकिन युधवीर क्रिकेट में ही अपना करियर बनाने का सपना देखने लगे. माता-पिता राजी नहीं थे. युधवीर अपनी पांच बहनों के बीच इकलौते भाई हैं. उन्होंने युधवीर को बहुत सपोर्ट किया । क्रिकेट की बारीकियों को सीखने के लिए क्रिकेट अकादमी ज्वाइन की। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने जमकर मेहनत की और एक बेहतरीन तेज गेंदबाज के रूप में उभर कर सामने आए. इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी करने की भी क़ाबलियत रखते हैं. युधवीर चरक 140 की रफ़्तार से गेंदबाजी करते हैं. युधवीर की रफ्तार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने जम्मू के लिए घरेलू मैचों की शुरुआत की. वे जम्मू में अंडर-19 मैच खेल चुके हैं. फिर अंडर 23 टीम का प्रतिनिधित्व किया. उसके बाद युधवीर हैदराबाद चले गए. जहां पर उनको अपने करियर में सही दिशा मिली. वहां हैदराबाद की अंडर 23 टीम में खेलने का मौका मिला।

5 हरप्रित बरार

हरप्रीत बरार का जन्म 16 सितंबर 1995 में पंजाब के मोगा नामक गाँव मे हुआ. एक साधारण परिवार में जन्मे हरप्रीत को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और देखने का शौक रहा है. बचपन मे ये घर मे ही क्रिकेट खेला करते थे जिसके कारण इन्हें घर वालो की डांट भी सुन्ना पड़ती थी. हरप्रीत ने 10 वर्ष की आयु से ही क्रिकेट का अभ्यास करना प्रारंभ कर दिया था. इनकी बैटिंग के साथ-साथ बॉलिंग में भी रुचि थी जिसने इन्हें एक ऑलराउंडर खिलाड़ी बनाया। हरप्रीत की प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ में सम्पन्न हुई। इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई एस डी कॉलेज, चंडीगढ़ से पूरी हुई। युवा भारतीय ऑलराउंडर हरप्रीत बरार लिस्ट ए और घरेलू टी20 के अलावे इंडियन प्रीमियर लीग में खेल चुके है। इंडियन प्रीमियर लीग में हरप्रीत बरार 7 मैचों की 7 पारियों में गेंदबाजी करते हुए 33.80 की औसत और 7.43 की इकॉनमी से रन खर्च करते हुए 5 विकेट झटके हैं। उस दौरान हरप्रीत की सबसे अच्छी गेंदबाजी 19 रन देकर तीन विकेट रहा है। इसके अलाबा उन्होंने बल्लेबाजी करते हुए आईपीएल में उन्होंने 67 रन बनाए हैं जिसमे उनका सर्वाधिक स्कोर 25 रन रहा है।

 

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अनुराग बघेल

एडिटर: अनुराग बघेल

मेरा नाम अनुराग बघेल है। मैं बिगत कई सालों से प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़ा हूँ। पत्रकारिकता मेरा पैशन रहा है। फिलहाल मैं हिन्दुस्तान 18 हिन्दी में रिपोर्टर ओर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं।

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