22 अप्रैल 2016 सिंहस्थ कुंभ ………….

In this Feb. 10, 2013 file photo, a Naga sadhu, or Hindu naked holy man, returns after taking a ritual dip at Sangam, the confluence of the Hindu holy rivers Ganges, Yamuna and the mythical Saraswati, during the Maha Kumbh festival at Allahabad, India. (AP Photo/ Saurabh Das, File)

 उज्जैन में 22 अप्रैल से शुरू होने वाले सिंहस्थ के लिए बड़ी संख्या में नागा साधु महाकाल की नगरी में डेरा जमा चुके हैं. वहीं, इसी सिंहस्थ के दौरान हजारों साधुओं के नागा साधू बनने की प्रकिया पूरी होगी. उज्जैन के सिंहस्थ में नागा साधू बनने वाले साधुओं को खूनी नागा कहा जाता है.नागा साधुओं की दुनिया सबसे रहस्यमयी होती है. लाखों साधु-संतों के बीच नागा साधुओं की दुनिया को सबसे निराला माना जाता है.

उज्जैन सिंहस्थ के दौरान 7 शैव व 3 वैष्णव अखाड़ों के हजारों साधुओं को नागा साधु बनाए जाने की प्रकिया को पूरा किया जाएगा. दरअसल, अखाड़ों के नियम के तहत केवल हरिद्वार और उज्जैन कुंभ के दौरान ही किसी साधु-संत को नागा साधु की दीक्षा दी जाती है. उज्जैन में दीक्षा लेने वाले साधुओं को खूनी नागा साधु कहा जाता है. खूनी नागा साधु धर्म की रक्षा के लिए अपना खून बहाने से भी पीछे नहीं रहते.

कोई भी आम आदमी जब नागा साधु बनने के लिए आता है, तो उसे लंबे समय ब्रह्मचर्य का पालन करवाया जाता है. पहले यह तय किया जाता है कि दीक्षा लेने वाला पूरी तरह से वासना और इच्छाओं से मुक्त हो चुका है अथवा नहीं.

नागा साधु की दीक्षा लेने के पहले खुद का श्राद्ध और पिंडदान करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है. नागा साधु बनने के लिए आए व्यक्ति को स्वयं को अपने परिवार और समाज के लिए मृत मानकर अपने हाथों से अपना श्राद्ध कर्म करना पड़ता है.

नागा साधुओं को वस्त्र धारण करने की भी अनुमति नहीं होती. अगर वस्त्र धारण करने हों, तो सिर्फ गेरुए रंग के वस्त्र ही नागा साधु पहन सकते हैं. भस्म ही उनके वस्त्र और उनका श्रृंगार होता हैं.नागा साधुओं को रात और दिन मिलाकर केवल एक ही समय भोजन करना होता है. एक नागा साधु को अधिक से अधिक सात घरों से भिक्षा लेने का अधिकार है. यदि सातों घरों से कोई भिक्षा ना मिले, तो उसे भूखा रहना पड़ता है.

नागा साधु केवल जमीन पर ही सोते हैं. इस नियम का पालन हर नागा साधु को करना पड़ता है. नागा साधु को सोने के लिए पलंग या खाट के इस्तेमाल की मनाइ होती है.

नागाओं को सेना की तरह तैयार किया जाता है. अखाड़े में प्रवेश के बाद उसके ब्रह्मचर्य की परीक्षा ली जाती है. इसमें 6 महीने से लेकर 12 साल तक लग जाते हैं. ब्रह्मचर्य का पालन करने पर उसे ब्रह्मचारी से महापुरुष बनाया जाता है. महापुरुष के बाद नागाओं को अवधूत बनाया जाता है. अवधूत रूप में दीक्षा लेने वाले को खुद का तर्पण और पिंडदान करना होता है.

इस प्रक्रिया के लिए उन्हें 24 घंटे नागा रूप में अखाड़े के ध्वज के नीचे बिना कुछ खाए-पीए खड़ा होना पड़ता है. इसके बाद अखाड़े के साधु द्वारा उनके लिंग को वैदिक मंत्रों के साथ झटके देकर निष्क्रिय किया जाता है.

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Author: Hindi Desk

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