भाजपा व UP सरकार के अंदर की खबर – मंत्रिमंडल विस्तार पर संकट, योगी व केशव प्रसाद मौर्या के बीच जारी द्वंद ने बढ़ाई मुश्किल

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उत्तर प्रदेश में जहां कोरोना से हालात बदतर हैं वहीं बीजेपी के नेता सत्ता के लिए अंदर ही अंदर सिर फुड़ौवल में लगे हैं…

लखनऊ – उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री (डिप्टी CM) केशव प्रसाद मौर्य के बीच चल रही खींचतान को बड़ा कारण बताया जा रहा है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले सरकार और संगठन में बदलाव करके टॉप लीडरशिप कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही यूपी के राजनीतिक हालात पर पीएम मोदी, अमित शाह और नड्‌डा प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर सकते हैं। इसमें आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

बीच का रास्ता निकालने की कोशिश

यूपी में 2017 में भाजपा सरकार के गठन से लेकर अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच सब कुछ ठीक नहीं रहा है। कई बार दोनों के बीच का विवाद खुलकर सामने भी आ चुका है। 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान केशव मौर्य ने पिछड़े वर्ग में काफी अच्छी पैठ बना ली थी। इसी के सहारे यूपी में BJP की सरकार बनी थी।

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अब केशव के साथ 17% ओबीसी वोट बैंक है। इसे किसी भी हालत में पार्टी गंवाना नहीं चाहती है। वहीं, योगी के हिंदूवादी चेहरे को भी प्रदेश में काफी पसंद किया जाता है। ऐसे में पार्टी योगी और केशव दोनों को ही नाराज नहीं करना चाहती है। इसलिए अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे केशव, डिप्टी सीएम पद से संतुष्ट होना पड़ा

2017 विधानसभा चुनाव के दौरान केशव मौर्य की अध्यक्षता में ही भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में शानदार जीत हासिल की थी। तब यह माना जा रहा था कि केशव ही अगले CM होंगे, लेकिन पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को कुर्सी सौंप दी। तब केशव को डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा था। डिप्टी सीएम होने के बावजूद केशव को कम तवज्जो दी जाती रही।

योगी गुट के लोग हमेशा सरकार में हावी रहते। यहां तक की केशव अपने मन से अपने ही विभाग के अफसरों को ट्रांसफर भी नहीं कर पाते थे। इसके लिए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी लेनी पड़ती थी। इससे केशव सरकार में होने के बावजूद खुश नहीं थे।

कब-कब भिड़े योगी और केशव?

2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य का नेमप्लेट एनेक्सी मुख्यमंत्री कार्यालय से हटा दी गई थी। विवाद बढ़ने पर दोनों लोगों का कार्यालय सचिवालय स्थित विधान भवन में स्थापित किया गया।
केशव की अगुवाई वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) के कामकाज की समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद करने लगे थे। विभाग के अफसरों के साथ मुख्यमंत्री सीधे बैठक करने लगे थे। इससे केशव को दूर रखा जाता था।

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मुख्यमंत्री ने PWD के कामकाज की समीक्षा शुरू की तो केशव प्रसाद मौर्य ने CM योगी के अधीन लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी में भ्रष्टाचार को लेकर मुखर हो गए। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग शुरू कर दी।

योगी आदित्यनाथ पर दर्ज मुकदमे आसानी से वापस हो गए, लेकिन केशव प्रसाद मौर्य की बारी आई तो फाइलें इधर-उधर होने लगी। PMO के हस्तक्षेप के बाद केशव के खिलाफ दर्ज मुकदमें हटा दिए गए।

PWD के एमडी की नियुक्ति भी मुख्यमंत्री कार्यालय से होती थी। केशव जिन अफसरों का नाम सुझाव में देते थे, उन्हें नहीं नियुक्त किया जाता था।

PWD निर्माण संबंधित जारी किए जा रहे बजट में मुख्यमंत्री कार्यालय के द्वारा बीते 4 साल में कई बार फाइलें वापस कर दी गई जिसको लेकर केशव प्रसाद मौर्य और मुख्यमंत्री कार्यालय में कई बार हंगामा हुआ।

गुरुवार देर शाम सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से राजभवन में मुलाकात की। सीएम ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया है। हालांकि, इस मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।

गुरुवार देर शाम सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से राजभवन में मुलाकात की। सीएम ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया है। हालांकि, इस मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात में क्या रहा?

27 मई यानी कल आनंदीबेन पटेल राज्यपाल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 1 घंटे हुई मुलाकात हुई। सूत्र यह बताते हैं कि, मंत्रिमंडल का विस्तार तो होगा लेकिन अंतिम निर्णय केन्द्र से हरी झंडी मिलने के बाद तय होगा। वहीं पीएम मोदी के करीबी व गुजरात कैडर के IAS रहे एके शर्मा के MLC बनाए जाने के बाद से लगातार उनके मंत्रिमंडल में अहम पद मिलने की चर्चाएं जारी हैं। पूर्वांचल में कोविड के प्रबंधन में बनारस मॉडल की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफ भी की।

मोदी के करीबी शर्मा के लगातार प्रदेश सरकार में मजबूत पद पाने को लेकर चल रही खबरों के बाद भाजपा संगठन और सरकार में कई गुट में लोग बट गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एके शर्मा को लेकर तीन अलग-अलग गुटों में लोग लामबंदी कर रहे हैं। फिलहाल भाजपा के विधायकों और संगठन में 4 साल में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने अपनी ही सरकार का विरोध किया और पत्र लिखे।

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एडिटर: हिन्दुतान 18 न्यूज़ रूम

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