हर लड़की को पता होने चाहिये अपने 10 अधिकार

Untitled-2अगर महिलाओं को और आगे बढ़ना है तो उन्हें अपने कानूनी अधिकार पता होने चाहिये। महिलाओं का एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के प्रति अब भी जागरूत  नहीं है, जिस वजह से उन्हे अन्याय सहने के बाद भी चुप रहना पड़ता है।
अगर उन्हें अपने सभी अधिकार पता होंगे तो वह इस दुनिया में कुछ भी कर सकती हैं।
 
हम अपनी महिला रीडर्स को उनके जरुरी 10 कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देंगे।

घरेलू हिंसा

अगर महिला उसी के घर में मारा-पीटा जा रहा है या अन्‍य अत्‍याचार हो रहे हैं तो वह सीधे न्यायालय से गुहार लगा सकती है। इकसे लिये उसे वकील की कोई जरुरत नहीं है। अपनी समस्या के निदान के लिए पीड़ित महिला- वकील प्रोटेक्शन ऑफिसर और सर्विस प्रोवाइडर में से किसी एक को साथ ले जा सकती है और चाहे तो खुद ही अपना पक्ष रख सकती है।

तलाक लेने के बाद का अधिकार

यदि किसी महिला ने तलाक ले लिया है तो उसका गुजाराभत्‍ता, धन और बच्‍चे की कस्‍टडी पाने का अधिकार उसे मिलता है। साथ ही अगर पति किसी दूसरी महिला के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहता है तो उसे अपनी पत्‍नी को गुजाराभत्‍ता देना होगा।

गर्भपात कराने का अधिकार

वैसे तो गर्भपात कराना अपराध है पर गर्भ की वजह से अगर महिला को जान का खतरा है तो, वह गर्भपात करा सकती है।

ऑफिस में काम करने का अधिकार

पुरुषों के बराबर काम करने के लिये महिलाओं की सैलरी उन्ही के बराबर होनी चाहिये। इसके अलावा ऑफिस में महिलाओं को 7 बजे के बाद रूकने के लिये प्रेशर नहीं दिया जा सकता। महिलाएं ऑफिस में होने वाले उत्‍पीड़न के खिलाफ खुद शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

पुलिस से जुड़े अधिकार

महिला अपराधी को सूर्यास्‍त से पहले या सूर्यास्‍त के बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा एक महिला की तलाशी केवल एक महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है।

पिता की संप्‍ति पर अधिकार

पिता की प्रॉपर्टी में लड़की को भी पूरा हक मिलेगा जितना कि लड़के और मां को। शादी के बाद भी लड़कियों को उनका अधिकार मिलेगा।

सेक्‍जुअल हैरेसमेंट से बचाव के अधिकार

छेड़छाड़ या फिर रेप जैसे घिनौने अपराध के लिये सख्‍त कानून हैं। रेप के केस में 7 साल या उम्रकैद की सजा हो सकती है। अगर कोई पुरुष महिला पर सेक्‍जुअल कमेंट करता है तो उसे 1 साल की सजा हो सकती है।

मेटर्निटी लीव

गर्भवती महिला को 12 हफ्ते की मेटर्निटी लीव बिना सैलरी कटे हुए मिलेगी। छुट्टी के दौरान महिला को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता और अगर उसका टीम लीड उसे इस अधिकार से वंचित करता है तो, वह उसकी शिकायत महिला कोर्ट में कर सकती है।

पहचान छुपाने का अधिकार

अगर किसी महिला पर कोई आरोप लगा है या रेप हुआ है तो से अपनी पहचान छुपाने का अधिकार है। चाहे वह पुलिस हो या फिर मीडिया, अगर वह महिला की पहचान सार्वजनिक करता है तो वह कानूनी अपराध होगा।

इंटरनेट से शिकायत करने का अधिकार

अगर महिला पुलिस स्‍टेशन जा कर शिकायत दर्ज करने में असमर्थ है तो वह मेल या पोस्‍ट के जरिये अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। वहीं दूसरी ओर पुलिस का फर्ज होता है कि वह उसे रिप्‍लाई कर के उसे हौसला दें कि उसकी शिकायत पर उचित कार्यवाही की जाएगी।
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Author: Hindi Desk

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